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आस्था पर विवाद बेमानी

कोटा. अमरनाथ यात्रियों की परेशानियों को देखते श्राइन बोर्ड को दी गई जमीन जम्मू-कश्मीर सरकार द्वारा वापस लेने के बाद देश भर में विरोध प्रदर्शनों का दौर जारी है। कहीं आगजनी हो रही है, तो कहीं कोई और विवाद, आवाम परेशान है।

इन सबके बीच भास्कर ने अमरनाथ यात्रा से लौटे कुछ श्रद्धालुओं से बात की तो उनका कहना था कि आस्था के मुद्दों पर किसी भी तरह का विवाद अनावश्यक होता है, हर हिन्दुस्तानी की कोशिश होनी चाहिए कि यात्रा अनवरत जारी रहे। श्रद्धालु बताते हैं, यात्रा में साक्षात् स्वर्ग-सा अनुभव होता है, तो वहां जाकर ऐसा लगता है जैसे भगवान शिव ने दर्शन दिए हों, हरियाली से आच्छादित घाटियां, मन को आल्हादित कर देती हैं।

यात्रा के दौरान भोले के नारों व भजनों से से मंत्रमुग्ध हुए यात्रियों को दुर्गम रास्तों व दुश्वारियों का पता ही नहीं चलता और सफल आसान होता चला जाता है। यात्रा के दौरान जगह-जगह विभिन्न संगठनों की ओर से लगाए जाने वाले भंडारे व चिकित्सा सहायतार्थ शिविरों के चलते यात्रियों को काफी मदद देते हैं।

ठंड और लंबे सफर का आनंद : चंबल कॉलोनी निवासी दसवीं के छात्र शोभित उपाध्याय को पहली बार अपने मामा गोविंद और माया के साथ यात्रा पर जाने का मौका मिला। शोभित का कहना है कि वहां काफी बर्फ पड़ती है और पैदल चलना पड़ता है, लेकिन भगवान शिव के जयकारों की गूंज यात्रियों के कानों में पड़ते ही उनकी ऊर्जा व स्फूर्ति पहले से अधिक बढ़ जाती है। बाबा बर्फानी के दर्शन मन को आल्हादित करने के साथ जीवन को एक नई ऊर्जा प्रदान करते हैं।

मन मोह लेती हैं हरियाली से अटी घाटी : तीसरी बार अमरनाथ की यात्रा कर लौटे शॉपिंग सेंटर निवासी अनिल अग्रवाल बताते हैं कि वहां यात्रियों के लिए ढेरों सुविधाएं उपलब्ध हैं, साथ ही पुलिस व सेना का कड़ा पहरा और हरियाली से आच्छादित सुंदर घाटी उत्साह, उमंग व जोश को दोगुना कर देती है। वे अपनी पत्नी शालू व बेटी प्रियंका के साथ 2007 में भी अमरनाथ यात्रा गए थे। शालू ने बताया कि शिवलिंग के दर्शन से विशेष अनुभूति होती है।

राजनीतिक स्टंट है भूमि का मुद्दा : यात्रा से लौटे सुमित बंसल व अरुण शुक्ला ने बताया कि श्राइन बोर्ड की भूमि का विवाद केवल राजनीतिक स्टंट है। कश्मीर क्षेत्र के स्थानीय नागरिक व प्रशासन नहीं चाहता कि यह यात्रा हो, लेकिन सामाजिक संगठनों व सेना के जवानों की वजह से यह यात्रा अनवरत् जारी है। वहां की वादियां काफी सुंदर हैं, जिससे यात्रा का आनंद भुलाया नहीं जा सकता। बाबा बर्फानी के दर्शनों के बाद ऐसा लगता है जैसे कि साक्षात भगवान के दर्शन हो गए हों।

भंडारों का आनंद अलग : 8वीं यात्रा कर चुके न्यू आकाशवाणी कॉलोनी में रहने वाले अमरसिंह भाटी ने बताया कि इस बार शिवलिंग काफी सुंदर दिखाई दिया। श्रीनगर में कुछ स्थानों पर उनकी टैक्सी पर भी पथराव हुआ। रास्ते में होने वाले भंडारों का आनंद अलग ही रहता है। सेना के जवान भी श्रद्धालुओं की मदद करते हैं। वहीं उनकी पत्नी ममता, पुत्री आकांक्षा व पुत्र भूपेंद्र सिंह ने बताया कि यह उनकी पहली यात्रा थी, जिसे वे कभी भुला नहीं सकते हैं।

सामान्य लगती है यात्रा : 16वीं बार अमरनाथ की यात्रा पर जाने वाले दुष्यंत कुमार मेहता ने बताया कि अब तो उन्हें यात्रा सामान्य ही लगती है। हालांकि वहां के स्थानीय व्यापारी यात्रियों के साथ लूट-खसोट करते हैं। उनका माना है कि सरकार को श्राइन बोर्ड को भूमि दे देनी चाहिए। वे अपनी पत्नी मधु श्रंगी, पुत्री शिल्पा व पुत्र धवन के साथ 2005 में यात्रा पर गए थे। पत्नी मधु ने कहा कि वहां की हरियाली व भक्तिमय माहौल आज भी नजरों से ओझल नहीं हो पाता, बार-बार वहां जाने की इच्छा होती है।





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