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बिजली विभाग राष्ट्रीय पक्षी का हत्यारा!

सीकर. transfer ‘मुझे यह लिखते हुए कोई संकोच नहीं है कि अजमेर विद्युत वितरण निगम,सीकर ने राष्ट्रीय पक्षी मोर को मारने का प्रोग्राम लांच किया है। ट्रांसफार्मर से खुले तार लटकते रहते हैं, जिसका खामियाजा मोरों को अपनी जान देकर चुकाना पड़ रहा है।’ कड़ा रुख अपनाते हुए उप वन संरक्षक ने विद्युत बोर्ड को पत्र लिखकर कहा है कि क्यों न इंजीनियर को राष्ट्रीय पक्षी का हत्यारा माना जाए!

करंट लगने से राष्ट्रीय पक्षी मोर की हो रही लगातार मौतों से वन विभाग उनके भविष्य को लेकर आशंकित नजर आ रहा है। डीसीएफ की यह कड़ाई यूं ही नहीं है। राष्ट्रीय पक्षी मोर की सुरक्षा का सवाल है।

आखिर हो भी क्यों न, एक तो सही देखभाल न होने के कारण राष्ट्रीय पक्षी की संख्या में दिनों-दिन गिरावट जो आ रही है। दूसरा पिछले कुछ महीनों में करंट से मोरों के मरने की घटनाएं तेजी से बढ़ी हैं। डीसीओ ने बताया कि पिछले कुछ महीनों में 100 से अधिक मोर करंट लगने से मर चुके हैं।

डीसीओ ने सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर (टीसीसी-तृतीय) आरवीपीएन, अजमेर को रानोली-खंडेला मोड़ ट्रांसमिशन लाइन के लिए मांगे गए एनओसी के संबंध में 20 जून को पत्र लिखकर 13 मोर के मरने और उनके पोस्टमार्टम रिपोर्ट का जिक्र करते हुए कहा गया है ‘विद्युत ट्रांसफार्मर को मोरों के शिकार के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है।

राष्ट्रीय पक्षी के शिकार में सात साल सजा का प्राविधान है। ऐसे में क्यों न दोषी विद्युत विभाग के इंजीनियर को इस आपराधिक मामले का दोषी मानकर कार्रवाई की जाए और ट्रांसफार्मर सीज कर दिए जाएं।’ डीसीओ की ओर से बिना सहयोग के एनओसी देने से भी साफ तौर पर इंकार कर दिया गया।

कैसे मर रहे हैं मोर : अधिकांशत: गांव के चौक पर ट्रांसफार्मर लगाया जाता है। चौक पर ही गांव के लोग चुग्गा आदि डालते हैं। चुग्गा खाने के लिए मोर आते हैं और इधर-उधर उड़ने से ट्रांसफार्मर की चपेट में आकर मर जाते हैं। गांव के बाहर या शहर में करंट से मोर के मरने की घटनाएं कम होती हैं।

क्या है अधिनियम : वन्य जीव अधिनियम एक्ट 1972 अन्तर्गत राष्ट्रीय पक्षी मोर की हत्या में सात साल कारावास की सजा का प्राविधान है। मोर के शिकारी के घर को सर्च करने में वारंट की आवश्यकता भी नहीं पड़ती है।

क्या कहते हैं अधिकारी : शुरूआती दौर में ही मोर के मरने की रिपोर्ट से सावधानी बरती जानी शुरू कर दी गई। ट्रांसफार्मर के कैप कवर करवा दिए गए हैं। विद्युतीकरण में इंसुलेटेड वायर का इस्तेमाल किया जा रहा है। हम सावधानी बरत रहे हैं, इसमें कोई अधिकारी क्या कर सकता है।
- केपी वर्मा, एक्सईएन, रूरल

बिजली विभाग की लापरवाही से राष्ट्रीय पक्षी मोर मर रहे हैं। वन क्षेत्र में विद्युतीकरण के लिए तब तक एनओसी नहीं दी जाएगी, जब तक मोरों के मरने के लिए किसी की जवाबदेही तय नहीं की जाएगी। विद्युत विभाग कड़े कदम उठाए।
- अर्जुन सिंह जुगतावत, डीएफओ





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