नई दिल्ली. भारत-अमेरिकी असैन्य परमाणु करार के मुद्दे पर यूएनपीए विभाजन की ओर बढ़ता नजर आ रहा है। शनिवार को गठबंधन में शामिल इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) तथा असम गण परिषद (अगप) ने यूएनपीए के प्रमुख दल समाजवादी पार्टी (सपा) द्वारा करार पर सरकार को समर्थन देने के फैसले से खुद को अलग कर लिया। उधर, सपा ने भी संकेत दिए कि वह राष्ट्रहित में यूएनपीए की कुर्बानी देने को तैयार है।
इनेलो नेता ओमप्रकाश चौटाला के मुताबिक उनकी पार्टी करार की कट्टर विरोधी है और उसे ‘अमेरिका का गुलाम’ बनने संबंधी तथ्य की ज्यादा चिंता है। उन्होंने कहा, ‘इससे पहले कांग्रेस ने उनका (सपा का) अपमान किया था। अब लगातार तीसरी बार वे अपमानित होना चाहते हैं। यह उनकी निजी सोच है।’
करार पर कांग्रेस के साथ आगे बढ़ने की सपा की बेकरारी पर अगप ने कहा कि यूएनपीए के घटक दल सामूहिक फैसला करेंगे कि वे मुलायम सिंह यादव नीत गठबंधन के साथ रहें या नहीं। अगप अध्यक्ष वृंदावन गोस्वामी ने आरोप लगाया कि सपा ने करार का समर्थन करने का फैसला करने से पहले यूएनपीए के घटक दलों से चर्चा नहीं की। इससे पहले तेलुगु देशम पार्टी का भी कथित बयान आया था कि यूएनपीए सपा के बगैर चलने को पूरी तरह तैयार है।
सरकार नहीं गिराने के संकेत:
उधर, सपा नेता अमर सिंह ने कांग्रेस से अपनी दोस्ती को उचित ठहराते हुए भाजपा पर यह कहकर हमला बोला कि आडवाणी बुश से कहीं बड़ा खतरा हैं। उन्होंने कहा, ‘आज वामदल, बसपा, भाजपा और चौटाला एक साथ आकर मतदान कर सकते हैं। यदि वामदलों के हमारे दोस्त सरकार को बसपा और भाजपा के साथ मिलकर गिराना चाहते हैं तो हम कुछ कहना नहीं चाहते, लेकिन हम यह काम नहीं कर सकते।’
सपा की सफाई:
अमर सिंह ने यह भी साफ किया, ‘न तो उन्होंने हमसे समर्थन के लिए कहा है और न ही हमने अपनी ओर से कोई वादा किया है। हम अभी तक बाहरी हैं।’
‘डील’ से इनकार:
अमर सिंह के मुताबिक, पार्टी ने करार को राष्ट्रहित में समर्थन दिया है। यह कोई हिंदू या मुस्लिम करार नहीं है। उन्होंने एटमी डील पर कांग्रेस और सपा में कोई ‘डील’ होने से इनकार किया।