इंदौर. दो दिन तक हिंसा की गिरफ्त में रहा इंदौर शनिवार को शांत रहा। शाम को बाहरी क्षेत्र के 11 थाना क्षेत्रों में 26 घंटे बाद कर्फ्यू में दो घंटे की ढील दी गई, जिसे बाद में एक घंटे और बढ़ा दिया गया। रविवार को पूरे शहर में क्षेत्रवार अलग-अलग समय पर छूट दी जाएगी जिसकी घोषणा उन क्षेत्रों में ही होगी।
शनिवार को संवेदनशील 13 थाना क्षेत्रों में कर्फ्यू में कोई राहत नहीं दी गई। उपद्रवग्रस्त जिंसी, खजराना, चंपाबाग जूनी इंदौर, रानीपुरा क्षेत्र भी पूरी तरह शांत रहे। कमोबेश ऐसी ही स्थिति मुकेरीपुरा, उदापुरा, लोहारपट्टी, मल्हारगंज, बंबई बाजार, गफ्फूर खां की बजरिया, छत्रीपुरा की भी रही। इन क्षेत्रों में कफ्यरू अपेक्षाकृत सख्ती से लागू किया गया।
पूरे हिस्से में सन्नाटा पसरा हुआ था और सड़कों पर केवल पुलिसकर्मी ही नजर आ रहे थे, जबकि बाकी क्षेत्रों में पुलिस केवल नजर रखे हुई थी। स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने 11 थाना क्षेत्रों में शाम 4 से 7 बजे तक कर्फ्यू में ढील दी। छूट मिलते ही फिर सड़कों पर अफरा-तफरी की स्थिति बन गई। लोग सब्जी और दूध की दुकानों पर टूट पड़े।
परीक्षाएं होंगी, प्रवेश-पत्र ही कर्फ्यू पास
स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) में लिपिक के 20 हजार पदों के लिए 6 जुलाई को परीक्षा होना है। शहर में ही 26 केंद्रों पर सुबह 9.15 बजे से परीक्षा होगी। कर्फ्यू से परीक्षा प्रभावित नहीं होगी। परीक्षार्थियों को प्रवेश पत्र के आधार पर अभिभावकों के साथ केंद्र तक आने-जाने की छूट रहेगी।
इसके अलावा व्यावसायिक परीक्षा मंडल द्वारा एमबीए व एमसीए के लिए आयोजित एमपी-एमईटी भी रविवार सुबह अपने निर्धारित समय पर होगी। प्रशासन ने यह भी तय किया है कि 6 जुलाई को होने वाली किसी भी प्रतियोगी परीक्षा के लिए प्रवेशार्थियों के प्रवेश-पत्र को ही कर्फ्यू पास माना जाएगा।
कर्फ्यू ने बढ़ाए दाम
कफ्यरू के कारण कई क्षेत्रों में रोजमर्रा की जरूरत की चीजों के दाम आसमान पर पहुंच गए हैं। छोटे व फुटकर व्यापारियों ने मौके का फायदा उठाया और चीजों के मनमाने दाम वसूले। दूध 30 से 40 रुपए लीटर और ब्रेड के पैकेट 20 रुपए तक बिके। यही हाल सब्जियों का भी रहा।
शांति का पैगाम
अभ्यास मंडल के बैनर तले शहर के प्रमुख वरिष्ठ नागरिक व समाजसेवी प्रेस क्लब में इकट्ठे हुए और लोगों से शांति की अपील की। उन्होंने शहर के रोशन इतिहास को याद कर मौजूदा स्थिति पर अफसोस भी जताया। साथ ही दोनों समुदायों में छुपे असामाजिक तत्वों को बेनकाब करने के लिए एकजुट प्रयास करने पर जोर दिया।
मदद के लिए आगे आए लोग
अस्पताल, लॉज व होस्टलों में रह रहे लोगों की मदद के लिए शहर की कई सामाजिक संस्थाएं व व्यावसायिक संगठन आगे आए। इन लोगों के लिए फल, सब्जी, दूध व दवाओं की व्यवस्था की। रेलवे स्टेशन व बस स्टैंड से लोगों को घर तक पहुंचाने में भी मदद की। ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों के खाने-पीने का इंतजाम भी आसपास के लोग ही कर रहे हैं।