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बंद समर्थकों ने थाना घेरा

रायपुर. बोड़सरा मुद्दे पर बंद के दौरान खमतराई इलाके में तोड़फोड़ करते युवकों को पुलिस ने हिरासत में लिया और हंगामा खड़ा हो गया। बंद समर्थकों ने थाना घेर दिया और युवकों को छोड़ने के लिए अड़ गए। उन्होंने रायपुर-बिलासपुर मार्ग जाम कर दिया। इस दौरान पुलिस से उनकी झूमाझटकी भी हुई। बाद में युवकों की रिहाई के बाद माहौल शांत हुआ।

हंगामे की शुरुआत सुबह 11 बजे जबरन बंद करा रहे युवकों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई से हुई। इसका पता चलते ही बड़ी संख्या में सतनामी समाज के लोग खमतराई थाने पहुंच गए। नारेबाजी करते हुए युवकों को तत्काल छोड़े जाने के लिए दबाव बनने लगे। इसी बीच वहां प्रदर्शनकारियों के समर्थन में समाज के पदाधिकारियों के अलावा बिरगांव नगरपालिका अध्यक्ष ओमप्रकाश देवांगन, नगर निगम नेता प्रतिपक्ष कुलदीप जुनेजा समेत कई पार्षद वहां आ गए।

उनकी मौजूदगी में बंद समर्थकों का प्रदर्शन और उग्र हो गया। प्रदर्शनकारियों ने खमतराई थाने के सामने रायपुर-बिलासपुर मार्ग अवरुद्ध कर दिया। चक्काजाम और थाने के सामने हंगामे की सूचना मिलते ही तत्काल एसपी सिटी डा. लाल उमेद सिंह, एएसपी क्राइम अजातशत्रु बहादुर सिंह, सीएसपी आईएच खान समेत कई वरिष्ठ पुलिस अफसर फोर्स लेकर थाने पहुंच गए।

अफसरों के समझाने के बाद भी कुछ बंद समर्थक थाने के सामने से नहीं हटे। उन्हें पुलिस ने खदेड़ने की कोशिश की। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच मामूली झूमाझटकी भी हो गई।

अफसरों के निष्पक्ष कार्रवाई के आश्वासन के बाद बड़ी मुश्किल से प्रदर्शनकारी सड़क से हटे। प्रदर्शन की वजह से रायपुर-बिलासपुर मार्ग दो घंटे तक बंद रहा। इस दौरान जाम में फंसे लोग देर तक हलाकान हुए। जाम फंसने से बचने के लिए कुछ वाहन रिंग रोड दो से होते हुए निकले।

क्या थी घटना : खमतराई में पाटीदार भवन के सामने सुबह जबरन बंद करा रहे दर्जनभर से ज्यादा युवकों ने ट्रांसपोर्ट दफ्तर को निशाना बनाया। वहां लाठी-डंडे से जमकर तोड़फोड़ की उसके बाद युवकों ने एक आटो रिक्शा को घेरा। उसके चालक के साथ मारपीट कर उसमें भी तोड़फोड़ करने लगे, तभी वहां पेट्रोलिंग पार्टी आ गई। तोड़फोड़ के आरोप में उन्हें दबोच लिया और थाने ले जाया गया। पुलिस की इसी कार्रवाई से बंद समर्थक भड़क गए थे।

जुर्म दर्ज होने से पहले ही समझौता : खमतराई टीआई आरके दुबे ने बताया कि तोड़फोड़ के मामले में आरोपी युवक शिव लहरे और उनके साथियों के खिलाफ कोई मामला बनाया जाता उससे पहले ही आटो रिक्शा के मालिक के साथ समझौता हो गया। मामला वापस ले लिया इसलिए तोड़फोड़ के आरोपियों को छोड़ दिया गया। बताते हैं, आटो रिक्शा बिरगांव के एक पार्षद की है।

आउटर में उत्पात : लाठी-डंडे से लैस बंद समर्थक युवकों ने आटो रिक्शा ही नहीं, सवारी बसों को भी नहीं चलने दिया। खमतराई इलाके में हंगामे के बावजूद जगह-जगह बसों को रोककर यात्रियों को नीचे उतार दिया गया।

नए पुल के पास युवकों ने ऐसी बस को रोक लिया, जिसमें धार्मिक आयोजन में हिस्सा लेने जा रहे श्रद्धालु बैठे थे। यात्रियों के आग्रह और समाज के पदाधिकारियों के बीच-बचाव के बाद बड़ी मुश्किल से उन्हें छोड़ा गया।





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