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Chhattisgarh
Bilaspur Bilaspur बिलासपुर. जल संसाधन विभाग में नियम-कानून ताक पर रखकर प्रमोशन कर दिए गए हैं। बताया जा रहा है कि इसमें न वरिष्ठता का ध्यान रखा गया है और न डिपार्टमेंटल प्रमोशन कमेटी (डीपीसी) की अनुशंसा ही ली गई है।
विभाग में किए गए प्रमोशन में वरिष्ठता क्रम में 561 नंबर पर रहने वाले जयंत पवार को बिलासपुर का अधीक्षण यंत्री बना दिया गया है, जबकि इसके पहले वालों के प्रमोशन का अता-पता नहीं है। इसी तरह से वरिष्ठता क्रम में 693 नंबर पर दर्ज एक इंजीनियर को अक्टूबर 2006 में सहायक अभियंता से पदोन्नत कर पेंड्रा में कार्यपालन यंत्री बना दिया गया।
इसके लिए नियम कानूनों को तो ताक पर रखा ही गया, पेंड्रा में नियमित तौर पर कार्यरत कार्यपालन यंत्री को भी हटा दिया गया। विभाग के प्रमोशन नियमों के अनुसार सहायक अभियंता को उसी पद पर काम करते हुए छह साल बीतने के बाद ही ईई बनाया जा सकता है, लेकिन इस मामले में नियमों की भी परवाह नहीं की गई। प्रमोशन में गड़बड़ी का आलम यह कि डीपीसी की सूची में 563 नंबर रहने वाले एन तिर्की को उनके गृह जिले जशपुर में ही कार्यपालन यंत्री बना दिया गया।
नियमत: प्रमोशन के बाद गृह क्षेत्र में ही पदस्थ नहीं किया जा सकता। बिलासपुर भी इस गड़बड़ी से अछूता नहीं रहा है। यहां पर विभागीय पदोन्नति सूची में 536 नंबर पर दर्ज इंजीनियर आलोक अग्रवाल को वरिष्ठता और नियमों को ताक पर रखकर खारंग डिविजन का कार्यपालन अभियंता बना दिया गया। इसी तरह से वरिष्ठता क्रम में 419 नंबर पर रहने वाले अरुण यदु को मुंगेली का कार्यपालन अभियंता बना दिया गया है।
कई वरिष्ठ इंजीनियर उनके अंडर में काम कर रहे हैं। हालत यह हुई है कि मध्यप्रदेश कैडर के इंजीनियर एके जैन को तबादले के बाद भी बैकुंठपुर का ईई बना दिया गया। बताया जा रहा है कि इसी तरह से पूरे प्रदेश में 42 लोगों को एग्जीक्यूटिव इंजीनियर बनाया गया है, जिसमें बीच-बीच से नाम चुनकर लोगों को नियुक्ति दी गई है और उनके आगे-पीछे वालों का अता-पता नहीं है।
प्रमोशन लिस्ट रुकी!
यह भी बताया जा रहा है कि प्रारंभिक तौर पर प्रमोशन में गड़बड़ी के बाद एक और प्रमोशन लिस्ट जारी की जा रही थी, लेकिन मुख्यमंत्री को इसकी जानकारी होने के बाद उन्होंने लिस्ट को ही रुकवा दिया है। यह भी बताया जा रहा है कि अब डीपीसी की बैठक करने पर विचार चल रहा है।