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Chhattisgarh
Bilaspur Bilaspur बिलासपुर. धर्मगुरु बालदास की रिहाई के लिए शनिवार को सतनामी समाज द्वारा किया गया बिलासपुर बंद बेअसर रहा। बंद के दौरान शहर की सभी दुकानें खुली रहीं। कांग्रेस का समर्थन भी बंद पर कोई असर नहीं डाल सका। बंद कराने निकले समाज के लोगों को कुछ जगहों पर व्यवसायियों व नागरिकों के विरोध का भी सामना करना पड़ा।
सतनामी समाज के धर्मगुरु बालदास की रिहाई की मांग को लेकर आज बंद का आह्वान किया गया था। प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने जिले के सभी पदाधिकारियों को बंद के समर्थन में जुटने के लिए कहा था। सुबह से ही सभी दुकानें खुली रहीं। दोपहर 12 बजे तक किसी भी दल की ओर से कोई पहल नहीं की गई।
करीब 1 बजे से सतनामी समाज के युवकों ने नेहरू चौक से झंडा-बैनर के साथ बाइक रैली निकाली। उनके पीछे जीप व मेटाडोर में सवार पुलिस कर्मी भी चल रहे थे। समाज के युवक व्यापारियों से दुकानें बंद करने का आग्रह कर रहे थे, लेकिन किसी भी व्यापारी ने दुकान बंद नहीं की। कुछ दुकानदारों ने रैली आते देखकर शटर गिरा दिया, लेकिन युवकों के गुजरने के बाद फिर से शटर उठा दिया गया।
वलराज पेट्रोल पंप पर जब युवकों ने बंद कराने कहा तो नागरिकों ने जमकर विरोध किया और युवकों को उलटे पांव लौटना पड़ा। ऐसा ही नेहरू चौक पर स्थित पेट्रोल पंप पर भी हुआ। देवकीनंदन दीक्षित चौक पर स्थित अंतूलाल पेट्रोल पंप को बंद देखकर लोगों को भ्रम हुआ, लेकिन बाद में पता चला कि दोपहर में लाइट बंद होने के कारण पंप बंद किया गया है।
आज गोलबाजार, सदरबाजार, शनिचरी, तेलीपारा, लिंक रोड, सरकंडा, बुधवारी बाजार, गांधी चौक स्थित सभी दुकानें खुली रहीं। हालांकि शनिवार को बिलासपुर बंद का प्रचार होने के कारण दोपहर तक दुकानों में अच्छी ग्राहकी नहीं दिखी। इधर धर्मगुरु बालदास व समाज के अन्य लोगों की रिहाई समेत 5 सूत्रीय मांगों को लेकर सतनामी समाज द्वारा सुबह महंत बाड़ा से रैली निकाली गई।
यह रैली प्रमुख मार्गो से होते हुए व्यापार विहार पहुंची। यहां से बंद का आह्वान करते हुए रैली नेहरू चौक पहुंची, जहां सभा आयोजित की कई। सभा में राजमहंत इंदल प्रसाद कोशले, जगन्नाथ प्रसाद भंडारी, दुखहरण भार्गव, राजा भास्कर, प्रभाकर गोरख, मोतीलाल र्कुे, दिनेश लहरे, धर्मेद्र बंजारे, राजेश भास्कर, उदय, कमल जांगड़े, श्यामाचरण वर्मा, संजय, रमाशंकर लहरे, हरीश चेलकर, छोटे पन्ना, गज्जू चेलकर, शिव कोरी, पिंकी, अघनु मंगेशकर, पूर्णाराम मंगेशकर, प्रेम धिरवानी, मोहन अनंत व समाज के अन्य व्यक्ति उपस्थित थे।