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Bilaspur Bilaspur बिलासपुर.
इस महीने गिनती के मुहूर्त शादियों का रिकार्ड बनाने को बेताब हैं। ग्रहों के गणित के कारण ऐसा पहली बार होगा, जब जुलाई में बड़े पैमाने पर शादियां होंगी। केवल पांच दिनों का मुहूर्त होने के कारण लोग भी इन्हें नहीं खोना चाहते, यही वजह है कि शहर के तकरीबन सभी शादी घर, बैंड बाजा, डीजे ही नहीं, बल्कि पंडित भी 8 से 12 जुलाई तक के लिए बुक हैं।
बाजार में शादी-ब्याह की खरीदारी चरम पर है। इस वर्ष अक्षय तृतीया की तरह पहला अवसर होगा जब देवउठनी एकादशी पर भी शुभ कार्य वर्जित रहेंगे। सूर्य के शुक्र में होने के कारण ऐसा योग बन रहा है।
सवा दो महीने के इंतजार के बाद फिर शादियों का सीजन आ गया है, वह भी केवल पांच दिनों के लिए। मई में लगा शुक्रास्त अब शुक्रोदय में बदल गया है। 8 जुलाई से शादियां और सभी शुभ कार्य शुरू होने की वजह से मार्केट में भी काफी रौनक बढ़ गई है।
गिनती के मुहूर्त होने के कारण लोग खरीदारी निपटा रहे हैं। ज्योतिषी एवं वास्तुविद् पं. दीपक शर्मा के अनुसार इससे पूर्व अंतिम मुहूर्त 26 अप्रैल था, तब से लगा विराम तीन दिनों बाद सूर्य के शुक्र से मुक्त होने पर हट जाएगा और जुलाई में पहली बार दर्जनों की संख्या में शादी-ब्याह का रास्ता साफ हो जाएगा।
अप्रैल के बाद से मुहूर्त का इंतजार कर रहे जोड़ों को लिमिटेड मुहूर्त से राहत मिली है और लोग इंतजामों में जुट गए हैं। अचानक पड़े मुहूर्तो के लिए भी बाजार सज गया है। कपड़े, जेवर व अन्य सामान की खरीदारी इन दिनों जोरों से चल रही है।
देवउठनी एकादशी की शुभ तिथि पर भी ग्रहों के योग के कारण शुभ कार्य वर्जित होंगे। 15 अक्टूबर से 15 नवंबर तक सूर्य शुक्रकी राशि में गोचर करेगा। इस बीच 9 नवंबर को पड़ रही देवउठनी एकादशी में शादी-ब्याह व अन्य मांगलिक कार्य नहीं हो सकेंगे। पं. शर्मा का कहना है कि ऐसा अवसर कब आया था, इसका कोई प्रमाण नहीं है।
उल्लेखनीय है कि ग्रह-नक्षत्रों के चलते ही इस वर्ष की अक्षय तृतीया पर भी मांगलिक कार्य नहीं हो पाए थे। अंशोदित मूहूर्त के कारण परिस्थितियां बदलती रहती हैं। 3 जुलाई तक शुक्रास्त के कारण कोई भी शुभ कार्य संभव नहीं था। इसके बाद अगले 4 दिनों तक यह दशा बाल्यावस्था दोष से प्रभावित रही। इससे मुक्त होने के बाद यानी 8 जुलाई से शुभ कार्यों की शुरुआत हो जाएगी, जो लगातार 12 जुलाई तक चलेगी।
11 का मुहूर्त सर्वश्रेष्ठ: पांच दिनों के मुहूर्त में भी 11 जुलाई का मुहूर्त सर्वश्रेष्ठ माना जा रहा है। इस दिन ‘भड़ली नवमी’ है, जो अक्षय तृतीया व देवउठनी एकादशी की तरह ही शुभ फल देने वाली तिथि मानी जाती है। भड़ली नवमी पर ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति सही होने के कारण इस दिन होने वाले शुभ कार्यो पर विघ्न-बाधाएं नहीं आतीं।
देवशयनी एकादशी 14 को
14 जुलाई को देवशयनी एकादशी मनाई जाएगी। मान्यता के अनुसार इस तिथि से देवता चतुर्मास के लिए शयनकाल में चले जाएंगे और शुभकार्यो पर चार महीने के लिए विराम लग जाएगा। 9 नवंबर को देवउठनी एकादशी होगी, जब शयनकाल समाप्त होगा, लेकिन सूर्य के शुक्र राशि में होने के कारण शुभ कार्यो पर लगा विराम नहीं हटेगा।
12 जुलाई के बाद सीधे 21 नवंबर को शादी का अगला मुहूर्त है। बताते हैं कि इस अवधि में न केवल शादी, बल्कि शादी-ब्याह की चर्चा भी नहीं की जाती, लिहाजा विवाह तय भी नहीं किया जा सकेगा।