अजमेर. गरीब नवाज के उर्स में जायरीन की खिदमत के लिए शनिवार को मुंबई के 250 सदस्यीय रजाकारों का दल अजमेर पहुंचा। एक-दो दिन में करीब100 और रजाकारों के आने की संभावना है। रजाकारों ने पुलिस व खुफिया महकमे के अफसरों से मुलाकात की और साथियों का परिचय प्रस्तुत किया।
सुन्नी दावत-ए-इस्लामी के रजाकार मोहम्मद खालिद रिजवी की अगुवाई में यहां पहुंचे। रिजवी ने बताया कि दल में 90 प्रतिशत रजाकार मुंबई, भिवंडी, मालेगांव और नासिक से आए हैं। इसके अतिरिक्त शेष सदस्य सूरत, नौसारी और बैंगलौर से भी आए हैं।
अगले एक-दो दिन में लगभग 100 रजाकार और आने की संभावना है। सभी रजाकार दरगाह के विभिन्न हिस्सों के अतिरिक्त पुष्कर रोड विश्राम स्थली, कायड़ विश्राम स्थली और ट्रांसपोर्ट नगर विश्राम स्थली पर जायरीन की रहनुमाई के लिए काम करेंगे। उर्स के दौरान रजाकार दिनरात सेवा कार्य में व्यस्त रहेंगे।
विरोध की बात कोरी अफवाह
रिजवी ने बताया कि इस बार ऐसी खबरें भी पहुंची थी कि कुछ खादिमों ने रजाकारों को परिसर में लगाने का विरोध किया है लेकिन यह सब अफवाह मात्र हैं। खुद्दाम-ए-ख्वाजा तो हमारे लिए दुआ करते हैं। पिछले साल अंजुमन सैयदजादगान के सदर सैयद गुलाम किबरिया चिश्ती समेत सभी पदाधिकारियों ने बैज जारी कर उन्हें जायरीन की खिदमत पर लगाया था। उन्होंने रजाकारों के सेवा कार्र्यो की सराहना की थी।
लगभग 20 साल से आ रहे हैं
सुन्नी दावत-ए-इस्लामी के रजाकार मोहम्मद खालिद रिजवी ने बताया कि रजाकार लगभग 20 साल से ख्वाजा गरीब नवाज के उर्स में आ रहे हैं। शुरुआत में दरगाह परिसर स्थित शाहजहांनी मस्जिद में तकरीर और नातख्वानी करते थे। पिछले तीन सालों से उन्हें आधिकारिक तौर पर जायरीन की खिदमत के लिए बुलाया जा रहा है।