अजमेर. लोगों को आपसी मोहब्बत और भाईचारे की तालीम की खुशबू से महकाने वाले हजरत ख्वाजा गरीब नवाज का दर सैकड़ों साल बाद भी गंगा-जमनी तहजीब का मरकज बना हुआ है। अकीदत के रूप में ख्वाजा गरीब नवाज की मजार पर पेश किया जाना वाला गुलाब आज भी ब्रrा जी की नगरी पुष्कर से ही आता है। इस उर्स में लगभग 150 टन गुलाब ख्वाजा साहब की मजार पर आशिकान-ए-ख्वाजा पेश करेंगे।
ख्वाजा गरीब नवाज की मेहर ही है कि मजार शरीफ पर पेश करने के लिए कभी गुलाब की कमी नहीं पड़ती। आम दिनों में लगभग 2 हजार किलो अर्थात 2 टन गुलाब ख्वाजा गरीब नवाज की मजार पर आशिकान-ए-ख्वाजा की ओर से अकीदत के रूप में पेश किया जाता है।
उर्स में यह 10 हजार किलो रोजाना के हिसाब से हो जाता है। लगभग 10 टन गुलाब रोजाना ख्वाजा को अकीदत के रूप में अकीदतमंद पेश करते हैं और अपनी मन्नत मानते हैं। अजमेर फूल व्यापारिक एसोसिएशन के अध्यक्ष पूनम चंद मारोठिया का कहना है कि सैकड़ों सालों से परंपरा चली आ रही है।
मजार शरीफ पर फूल चढ़ाने वाले कम पड़ जाते हैं, लेकिन कभी गुलाब की कमी नहीं हुई। इस बार भी पुष्कर के गुलाबी गुलाब के अतिरिक्त जयपुर और जोधपुर से भी व्यापारियों ने लाल गुलाब मंगाया है।
अतिरिक्त कर्मचारी
नाजिम अहमद रजा ने बताया कि उर्स के दौरान ख्वाजा गरीब नवाज की मजार पर फूलों की मात्रा बढ़ जाती है। इसे देखते हुए आम दिनों की अपेक्षा अधिक कर्मचारी फूलों को उठवाने के लिए 24 घंटे लगाए गए हैं। मजार शरीफ के फूलों की बेकद्री न हो इसके लिए अंदरकोट में स्थित कुएं में इन फूलों को ठंडा करवाया जा रहा है। उर्स के बाद फूलों के उपयोग के बारे में विशेषज्ञों से राय ली जाएगी।