बीकानेर. ऊंट उत्सव के दौरान अगले वर्ष जनवरी माह में लाडेरा के धोरों में एक बार फिर से रेगिस्तान का जहाज करतब दिखाएगा तो पर्यटन विभाग की ओर से भी कई सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। ये सब तो ठीक है लेकिन जिला प्रशासन व पर्यटन विभाग ने लाडेरा को लहरदार रेतीले धोरों पर पर्यटन को बढ़ावे या विकास कार्य करवाने को लेकर सुध नहीं ली है।
विश्व प्रसिद्ध बीकानेर के ऊंट उत्सव के कई कार्यक्रम इस वर्ष के आरंभ में कतरियासर गांव की जगह लाडेरा गांव के धोरों में हुए। उत्सव के वक्त एक बारगी लाडेरा के ये धोरे रात में भी रोशनी से नहा उठे थे। अब स्थिति ये है कि सरकार व प्रशासन की अनदेखी के चलते यहां पर केवल धूल उड़ रही है। राज्य सरकार ने यहां पर्यटन विकास के नाम पर एक रुपया भी खर्च नहीं किया है और ना ही ऐसी कोई योजना बनाई है।
लाडेरा गांव को जब पिछली बार ऊंट उत्सव के लिए चिन्हित किया था तब यहां के ग्रामीण खुशी के झूम उठे थे, खुशी इस बात की थी कि उनके गांव का नाम देश के पर्यटन मानचित्र पर अंकित हो गया है।
पर्यटकों के साथ-साथ ग्रामीणों ने भी उत्सव में हुए कार्यक्रमों का लुत्फ उठाया था लेकिन चार दिन की चांदनी फिर अंधेरी रात। अब फिर से लाडेरा के धोरों पर आगामी ऊंट उत्सव की तैयारी शुरू होने को है और इसमें भाग लेने प्रतिभागियों ने विशेषकर ऊंट मालिकों ने भी अपने-अपने स्तर पर तैयारी शुरू करेंगे लेकिन जिला प्रशासन व पर्यटन विभाग ने लाडेरा की तरफ मुंह मोड़कर भी नहीं देखा है।
भूला दिया लाडेरा को
हर वर्ष जनवरी माह में आयोजित होने वाले तीन दिवसीय ऊंट उत्सव में कई तरह के सांस्कृतिक कार्यक्रम व प्रतियोगिताएं होती हैं। जनवरी 2008 में भी उत्सव की शुरुआत डा. करणीसिंह स्टेडियम से हुई, जहां लोक कलाकारों द्वारा संगीत व नृत्य व कई ऊंटपालकों की ओर ऊंटों के नृत्य की प्रस्तुतियां भी दी गईं। इसके अलावा कैमल डेकोरेशन, ऊंटों की फर कटिंग के साथ-साथ मिस्टर बीकाणा व मिस मरवण प्रतियोगिता भी हुई।
इसके बाद दो दिवसीय कार्यक्रम लाडेरा गांव के धोरों में हुए। यहां ऊंटों व घोड़ों की दौड़, कुश्ती, खो-खो व कबड्डी प्रतियोगिता के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रम हुए। इसके अलावा कैम्प फायर व अग्नि नृत्य के आयोजन भी हुए। ऊंट उत्सव में सांस्कृतिक कार्यक्रम व प्रतियोगिता के विजेताओं को पुरस्कार भी वितरित किए गए लेकिन कार्यक्रम के कुछ ही दिनों बाद लाडेरा को भुला दिया गया।
पर्यटन विभाग के मुताबिक आगामी ऊंट उत्सव के आयोजन के लिए करीब 12 लाख रुपए स्वीकृत हो चुके हैं। स्वाभाविक रूप से उत्सव की तैयारी भी विभाग के अधिकारी जल्द ही शुरू कर देंगे लेकिन लाडेरा के धोरों में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने अब तक कोई कदम नहीं उठाया है।