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Chandigarh Chandigarh चंडीगढ़. बिजली विभाग ने चार साल तक नगर निगम से ज्यादा वसूले 91.24 लाख रुपए में से 57 लाख रुपए निगम के खाते में जमा करा दिए हैं। निगम के अगले 22 बिलों में यह रकम एडजस्ट होगी।
निगम की डिलक्स बिल्डिंग में 1996 से बंद पड़े मीटर का बिजली विभाग एवरेज बिल वसूलता रहा था। बाद में पाया गया कि जुलाई 2004 से जून 2007 के दौरान बिजली विभाग ने 91.24 लाख ज्यादा वसूले हैं। इससे पीछे का रिकॉर्ड निगम के पास नहीं था, नहीं तो राशि 2 करोड़ तक हो सकती थी। निगम के मौजूदा एक्सईएन सुरिन्दर सिंह कंडौला जून 2007 में पंजाब से निगम में डेपुटेशन पर आए थे और निगम बिल्डिंग के सब स्टेशन के बंद पड़े मीटर को बदलवा दिया था।
उन्होंने पांच-छह महीने रीडिंग चेक की तो हर बिल में एवरेज के मुकाबले पांच लाख रुपए कम निकले। 1996 से बिजली विभाग निगम से एवरेज बिल वसूल रहा था। एक्सईएन कंडौला ने बिजली विभाग द्वारा जुलाई 2004 से जून 2007 तक भेजे गए एवरेज बिलों का रीडिंग और लोड से मिलान करके अंतर निकाला तो पता चला कि बिजली विभाग ने 91.24 लाख रुपए ज्यादा वसूले हैं।
रिपोर्ट बनाकर चीफ इंजीनियर को भेजी गई और बिजली विभाग से रकम अदा करने को कहा गया। लेकिन प्रशासन और निगम के चीफ इंजीनियर के बीच मामला सैटल न हो सका था।
भास्कर का खुलासा
भास्कर के 12 अप्रैल के अंक में ‘निगम को 91 लाख का चूना’ हेडिंग से खबर छपी थी। उस पर प्रशासक के सलाहकार प्रदीप मेहरा ने निगम और प्रशासन के चीफ इंजीनियर को रिकॉर्ड के साथ बुलाया था। प्रशासन के चीफ इंजीनियर एसके जेतली ने माना था कि जो रकम ज्यादा वसूली गई है उसे बिजली विभाग बिलों में एडजेस्ट करने को तैयार है।
इस पर निगम के चीफ इंजीनियर एसके बंसल ने कहा था कि बिल्डिंग का मीटर पिछले 12 साल से बंद था। इसका रीडिंग के साथ मिलान करें तो अंतर 2 करोड़ रुपए पार कर जाएगा। निगम सिर्फ चार साल के एवरेज बिल के आधार पर पेमेंट मांग रहा है। एडवाइजर ने चीफ इंजीनियर को निर्देश दिए थे कि यह रकम बिलों में एडजस्ट कर दी जाए।
>> निगम का दो माह का बिल करीब 4.10 लाख रुपए आता है। निगम को अपनी सेक्टर-17 की डिलक्स बिल्डिंग के बिजली के 22 बिल नहीं भरने पड़ेंगे। इन सबकी पेमेंट प्रशासन पहले वसूले गए एवरेज बिलों की पेमेंट में एडजस्ट करेगा।
सुरिन्द्र सिंह कंडौला, एक्सईएन इलेक्ट्रिकल विंग नगर निगम