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विंशोत्तरी दशा साधन

ज्योतिष सीखें.jyotish भयात-भभोग ज्ञात करने के पश्चात विंशोत्तरी महादशा निकालने (ज्ञात करने) के लिए भयात एवं भभोग को पहले पलात्मक बनाना आवश्यक है। अर्थात भयात-भभोग जो कि घटी एवं पल में वर्णित है उसे केवल पल में लिखना है। दोनों को पलात्मक बनाने के पश्चात अलग-अलग स्थानों पर लिख दें। विंशोत्तरी महादशा 120 वर्षो की होती है। इनको 9 महादशाओं में विभक्त किया गया है।

सूर्य की दशा 6 वर्ष, चंद्र की 10 वर्ष, मंगल की 7 वर्ष, राहु की 18 वर्ष, गुरु की 16 वर्ष, शनि की 19 वर्ष, बुध की 17 वर्ष, केतु की 7 वर्ष, शुक्र की दशा 20 वर्ष की, इस प्रकार कुल 120 वर्ष हुए।

9 महादशाओं को 27 नक्षत्रों में विभाजित किया गया है। जैसे कृतिका, उत्तरा फाल्गुनी तथा उत्तराषाढ़ा में जन्म लेने वालों बच्चों को सूर्य की, रोहिणी, हस्त, श्रवण नक्षत्र में जन्म होने पर चंद्र की दशा, मृगशिरा, चित्रा, धनिष्ठा नक्षत्र होने पर राहु की दशा, पुनर्वसु, विशाखा, पूर्वा भाद्रपद नक्षत्र होने पर गुरु की दशा, पुष्य, अनुराधा, उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र होने पर शनि की दशा, आश्लेषा, ज्येष्ठा, रेवती नक्षत्र होने पर बुध की दशा, मघा, मूल, अश्विनी नक्षत्र होने पर केतु की दशा, पूर्वा फाल्गुनी, पूर्वाषाढ़ा, भरणी नक्षत्र होने पर शुक्र की दशा में जन्म माना जाएगा।

जातक का जन्म किस दशा में हुआ है, यह जानने के लिए उपरोक्तानुसार निर्णय लिया जा सकता है। पंचांगों में भी तालिका दी जाती है किंतु यदि तालिका उपलब्ध न हो तो, कृतिका से जन्म नक्षत्र की संख्या गिन लें तथा नौ से भाग देने पर 1 बचे तो सूर्य, 2 बचे दो चंद्र तथा 3 बचे तो मंगल, इसी प्रकार 0 बचे तो शुक्र की दशा में जन्म समझें।

उपरोक्त पलात्मक भयात में जातक के जन्म नक्षत्र के अनुसार दशा ज्ञात कर उसके वर्षो से गुणा करें तथा प्राप्त कुल फल वर्ष होंगे तथा शेष (लब्ध) को 12 से गुणा करे तथा पुन: पलात्मक भभोग से भाग देने पर प्राप्त फल माह होंगे। शेष (लब्ध) में 30 का गुणा कर पुन: पलात्मक भभोग से भाग देने पर प्राप्त पल दिन होंगे। शेष (लब्ध) मे 24 का गुणा करें तथा पुन: पलात्मक भभोग से भाग दें। प्राप्त फल घंटे होंगे। शेष (लब्ध) में 60 का गुणा करें। पुन: पलात्मक भभोग से भाग देने पर प्राप्त फल मिनट होंगे।

अब हमारे पास वषर्-माह-दिन-घंटे-मिनट, जो प्राप्त हुए हैं, यह उस दशा का बीता हुआ समय (भुक्त) होगा। दशा के वर्षो से कम करने से भोग्यकाल (जो अभी भोगना है) ज्ञात होगा। इसे हम निम्न उदाहरण से समझ सकते हैं,

दिनांक 20-06-2008 को प्रात: 11.10 बजे उज्जैन में बालक का जन्म हुआ। वेलांतर-देशांतर संस्कार के पश्चात इष्टकाल आया 12.10। उस दिन भरणी नक्षत्र 33 घटी 35 पल (विक्रमादित्य पंचांग अनुसार) है। गत नक्षत्र अश्विनी 37 घटी 22 पल है। भयात 34:48 (60-37:22 गत नक्षत्र = 22=38+12.10 इष्टकाल) भभोग 56.13 (22:38+33:35) आया। भयात को पलात्मक बनाया 2048 (34x60+48)। भभोग को पलात्मक बनाया 3373 (56x60+13) चूंकि भरणी नक्षत्र का जन्म है। अत: कृतिका से 27वां नक्षत्र 9 से भाग देने पर 0 आया।

इसलिए उपरोक्तानुसार बालक का जन्म शुक्र की महादशा में हुआ। शुक्र की दशा 20 वर्ष की होती है। पलात्मक भयात में 20 वर्ष का गुणा (2088x20) किया तो फल आया 41760। इसमें पलात्मक भभोग 3373 से भाग दिया। 12 फल आया तथा शेष लब्ध 1284 आए।

इसमें 12 माह का गुणा करने पर 15408 (1284x12) आए। पुन: पलात्मक भभोग से भाग दिया। फल 4 आया। शेष 1916 बचे। 30 दिन का गुणा किया (1916x30) 57480 में पुन: 3373 का भाग लगाया। 17 फल आया। शेष 139 में 24 का गुणा करने से पलात्मक भभोग से भाग दिया 8 आया तथा शेष 60 से गुणा करने (3336x60) पर 59 फल आया।

20 वर्ष की महादशा में से 12 वर्ष, 4 माह, 17 दिन 0 घंटे एवं 59 मिनट घटाए गए। इस तरह से ज्ञात हुआ कि 07 वर्ष, 07 माह, 12 दिन, 23 घंटे एवं 1 मिनट शुक्र की महादशा बालक को भोगना शेष है।





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