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शहर बनेंगे सोलर सिटी

जोधपुर.solar सूरज के तीखे तेवर से त्रस्त हो रहे राज्य के प्रमुख शहर यदि इसे सौगात मानने की ठान लें तो ‘सोलर सिटी’ के रूप में उन्हें नया चेहरा मिल सकता है।

देश में सोलर सिटी विकसित करने के लिए संभावनाएं रखने वाले साठ शहरों की तलाश में जुटे नवीनीकरण ऊर्जा मंत्रालय के लिए राज्य के प्रमुख शहर ऐसे सशक्त विकल्प हो सकते हैं, जिनमें न केवल देश के लिए रोल मॉडल बनने की सोलर ‘ताकत’ है, बल्कि रिसर्च की भी भरपूर संभावनाएं हैं।

ऑस्ट्रेलिया के सोलर सिटी प्रोग्राम को भारत में लागू करने की इस मुहिम का हिस्सा बनने के लिए बड़ी शर्त यही है कि इसके लिए हमें हाथ आगे बढ़ाना होगा। मंत्रालय वित्तीय और तकनीकी मदद देने के लिए तैयार है, केवल हमारे शहरों के निकायों के पहल करने भर की देर है।

पिछले कुछ अरसे से जिस तरह बिजली संकट गहराने से आए दिन कटौती का सामना करना पड़ रहा है, निकाय अपनी खस्ता माली हालत के कारण स्ट्रीट लाइटों को रोशन करने का बिल नहीं चुका पा रहे हैं, हमारे सामने भी एक बड़ी चुनौती खड़ी हो रही है। टोक्यो ने 2020 तक अपनी शहरी ऊर्जा खपत का 20 प्रतिशत हिस्सा गैर-पंरपरागत स्रोतों से जुटाने पर काम शुरू कर दिया है।

न्यूयार्क सहित अमेरिका के 200 दूसरे शहर भी इसी तरह के लक्ष्य को लेकर जुट गए हैं। हमारे यहां दिक्कत यह है कि मंत्रालय ने योजना लांच कर दी, तो शहरी निकाय और राज्य सरकार नींद में है। सूर्यदेवता मेहरबान हैं तो क्यों न हम अपने शहर को सोलर सिटी बनाएं? इसका जवाब और संभावनाएं ढूंढने की ‘भास्कर’ की कोशिश में सामने आया कि यदि शहर संकल्प ले ले तो न केवल हम मौजूदा बिजली की खपत में बहुत बड़ी बचत कर सकते हैं, बल्कर्ि ईधन के संकट का भी हल निकाल सकते हैं। सबसे बड़ा फायदा तो राज्य में इस क्षेत्र में हुई रिसर्च का भी है।

जोधपुर स्थित केंद्रीय रुक्ष अनुसंधान संस्थान (काजरी) में जहां वैज्ञानिकों की एक पूरी विंग पिछले लंबे अरसे से सोलर पावर पर ही काम कर रही है और कई उपकरणों का विकास कर चुकी है, वहीं उदयपुर स्थित एमपीयूएटी के डेयरी कॉलेज में सोलर ऑटो, सोलर फ्रीज, सोलर वाटर फिल्टर आदि बनाए जा चुके हैं। इन उपकरणों का सफलतापूर्वक प्रयोग किया जा चुका है। कई अन्य यूनिवर्सिटी भी इस दिशा में काम कर रही हैं, लेकिन व्यापक पैमाने पर इसे नहीं अपनाने से अब तक हम इको-फ्रेंडली एनर्जी से दूर ही रहे हैं।

क्या है सोलर सिटी प्रोग्राम : केंद्रीय नवीन और नवीनीकरण ऊर्जा मंत्रालय ने 28 फरवरी को सोलर सिटी प्रोग्राम देश भर में लागू किया है। इसके तहत 11 वीं पंचवर्षीय योजना में देश के 60 शहरों को सोलर सिटी का दर्जा देने की योजना है। प्रत्येक राज्य से कम से कम एक शहर और अधिकतम 5 शहरों को इस प्रोग्राम के लिए चुना जाएगा।

शहरी क्षेत्रों में ऊर्जा के परंपरागत स्रोतों पर निर्भरता कम करते हुए अक्षय ऊर्जा स्रोतों से लोगों को जोड़ना इस प्रोग्राम का मुख्य मकसद है। इसके लिए केंद्र शहरी निकायों की मदद लेगा, जो अपने शहर को सोलर सिटी के रूप में विकसित करने का रोडमैप बनाते हुए उसे अमली जामा पहनाएंगे।

क्या होगा फायदा : सोलर सिटी के रूप में चिह्न्ति शहर के लिए मंत्रालय मास्टर प्लान बनाने में सहयोग करेगा। यह मास्टर प्लान शहर की सभी सेक्टरों में मौजूदा ऊर्जा जरूरतों का आकलन करते हुए आने वाले दस सालों में खपत में दस प्रतिशत की कमी लाने पर केंद्रित होगा। प्रोग्राम पर अमल के लिए निकाय को सोलर सिटी सेल गठित करना होगा।

जोधपुर नगर निगम यदि इस दिशा में पहल करता है तो उसे पचास लाख रुपए की ग्रांट मिलेगी। यह ग्रांट मास्टर प्लान तैयार करने, सोलर सेल के गठन तथा अक्षय ऊर्जा को प्रोत्साहित करने की गतिविधियां आयोजित करने पर खर्च की जा सकेगी।





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