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Madhya Pradesh
Gwalior Gwalior ग्वालियर.
अब महिलाएं अपने साथ हो रहे र्दुव्यवहार को घर के किसी कोने में सिसकते हुए नहीं सहती हैं। वे इसके विरोध में आवाज उठा रही हैं और अपने कानूनी अधिकारों का अहसास भी करा रही हैं।
‘घरेलू हिंसा से बचाव कानून 2005’ के अंतर्गत इस वर्ष दर्ज हुए 80 प्रकरण इस बात का सबूत हैं। ये प्रकरण, संख्या के हिसाब से भले ही कम हों लेकिन महिलाओं में अधिकारों को लेकर आई चेतना को उजागर करते हैं।
यदि आप बच्चों को शिक्षा से वंचित रख रहे हैं,अपनी पत्नी को नौकरी करने या किसी से मिलने से रोकते हैं,परिवार की किसी लड़की के साथ शादी-विवाह के मामले में जोर-जबरदस्ती करते हैं या बात-बात में आत्महत्या करने की धमकी देते हैं तो आप ‘घरेलू हिंसा ’ के भावनात्मक र्दुव्यवहार के अंतर्गत दोषी पाए जा सकते हैं। आप तभी तक बच रहे हैं जब तक आपके पड़ोसी आपके इन र्दुव्यवहारों को अनदेखा कर रहे हैं या फिर पीड़िता आपके विरुद्ध ‘घरेलू हिंसा से बचाव कानून 2005’के अंतर्गत आवाज नहीं उठा रही है।
इस कानून के अंतर्गत उन सभी र्दुव्यवहारों के विरूद्ध कार्रवाई की जाती है जिनकी चपेट में महिलाएं घर और बाहर आती हैं किंतु जानकारी के अभाव में,शर्म या झिझकवश परिस्थितियों से समझौता कर चुप बैठ जाती हैं। इस कानून के अंतर्गत पांच तरह के र्दुव्यवहार शामिल हैं, जिनसे पीड़ित होने पर कोई भी महिला शिकायत दर्ज करा सकती हैं।
क्या है घरेलू हिंसा
महिला या उसके नाबालिग बच्चों के साथ किया गया ऐसा व्यवहार जिसकी वजह से उसे क्षति होती है या उसके स्वास्थ्य, सुरक्षा या जीवन पर कोई खतरा आता है वह घरेलू हिंसा की परिभाषा में शामिल है।
र्दुव्यवहारों में शामिल हैं शारीरिक र्दुव्यवहार इसके अंतर्गत पीटना,थप्पड़ मारना, काटना, धक्का देना, किसी भी प्रकार का शारीरिक कष्ट देना आपराधिक श्रेणी में आता है।
मौखिक र्दुव्यवहार
बेइज्जती करना,गाली देना,मजाक उड़ाना, लड़का न होने पर या दहेज कम मिलने पर ताने देना।
यौनिक र्दुव्यवहार
जबरदस्ती यौन संबंध,अश्लील तस्वीरें, फिल्म दिखाना, बलपूर्वक यौन संबंध बनाना आदि शामिल हैं।
आर्थिक र्दुव्यवहार
कोर्ट द्वारा कानूनन मिले संसाधन से वंचित रखना, स्रीधन इस्तेमाल न करने देना, संयुक्त संपत्ति से वंचित रखना, पीड़िता व बच्चों की घरेलू जरूरतें पूरी न करना।
कब की जा सकती है शिकायत
घरेलू हिंसा होने की आशंका हो या जब घरेलू हिंसा की घटना हो रही हो अथवा जब घरेलू हिंसा घटित हो चुकी हो तब इसकी शिकायत की जा सकती है।
कौन कर सकता है शिकायत
घरेलू हिंसा से पीड़ित महिला तो शिकायत दर्ज करा ही सकती है किंतु पड़ोसी भी निरन्तर हो रहे र्दुव्यवहारों की शिकायत संबंधित अधिकारियों से कर सकता है।
कहां कर सकते हैं शिकायत
परियोजना अधिकारी
मप्र राज्य सरकार ने इसके लिए महिला बाल विकास विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारी/परियोजना अधिकारी को अधिकृत किया गया है।
पुलिस आफिसर
यदि पुलिस को घरेलू हिंसा की शिकायत मिलती है तो वह पीड़िता को संरक्षण अधिकारी के पास ले जाएगी ताकि वह मजिस्ट्रेट तक पहुंच जाए।
सर्विस प्रोवाइडर
इसके लिए आवेदित एनजीओ(रजिस्टर्ड) को अधिकृत किया गया है।
प्रथम श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट या मेट्रोपालिटन मजिस्ट्रेट से
पीड़ित महिला प्रथम श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट या मेट्रोपालिटन मजिस्ट्रेट से भी शिकायत कर सकती है। इसके साथ ही संरक्षण अधिकारी अथवा सेवा प्रदाता के माध्यम से भी पूरे प्रकरण की रिपोर्ट ली जाती है।
शहरी क्षेत्र की शिकायतें प्राप्त
>> जबसे यह कानून प्रभाव में आया है तब से हमारे पास केवल चार या पांच केस आए हैं। इनमें भी ग्रामीण क्षेत्र के नहीं अपितु शहरी क्षेत्र के मामले ही दर्ज हैं।
सीमा शर्मा,जिला कार्यक्रम अधिकारी, महिला बाल विकास विभाग
80 केस आए हैं
>> मेरी जानकारी के मुताबिक, इस वर्ष शहर में 80 केस दर्ज हुए हैं। इससे स्पष्ट होता है कि महिलाएं अत्याचारों के खिलाफ आवाज उठाने लगी हैं। किंतु अभी भी जागरूकता का अभाव है। दूसरा, प्रोटेक्शन आफिसर और पुलिस अधिकारी को स्वयं पूरी जानकारी नहीं होती कि पीड़िता के लिए वह किस तरह मददगार साबित हो सकते हैं। इसके लिए राज्य सरकार को जगह-जगह होर्डिग्स लगवाने के साथ, मामले की शिकायत करने के लिए संबंधित अधिकारियों के नाम व पते प्रचारित करने चाहिए।
सुधा द्विवेदी,एडवोकेट