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भारतीय दूतावास दहला

काबुल/नई दिल्ली.blastk अफगानिस्तान की राजधानी काबुल की कड़ी सुरक्षा वाले क्षेत्र में भारतीय दूतावास पर सोमवार को फिदायीन हमले में 41 लोग मारे गए जिनमें दो अधिकारियों सहित चार भारतीय शामिल हैं।

हमले में 141 लोग घायल हुए हैं, जिनमें अनेक की हालत गंभीर है। किसी भी भारतीय दूतावास पर यह पहला बड़ा आतंकी हमला है। उधर, सोमवार शाम पाकिस्तान के कराची शहर में हुए सीरियल ब्लास्ट में दो लोगों के मारे जाने और 45 लोगों के मारे जाने की भी खबर है।

भारत ने काबुल में हुए हमले की कड़ी निंदा की है। तालिबान के एक प्रवक्ता ने हमले की जिम्मेदारी लेने से इनकार किया है। भारत ने एक उच्चस्तरीय टीम काबुल भेजने का फैसला किया है।

नई दिल्ली में भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने काबुल में भारतीय डिफेंस अटैची ब्रिगेडियर आरडी मेहता तथा भारतीय विदेश सेवा के अधिकारी वी. वेंकटेश्वर राव के मरने की पुष्टि की है। मृतकों में भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के दो जवान अजय पठानिया और रूप सिंह शामिल हैं।

दूतावास का एक अन्य कर्मचारी नियामतुल्ला भी मारा गया जो एक स्थानीय नागरिक था। काबुल में भारतीय राजदूत जयन प्रसाद सुरक्षित हैं। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक यह हमला उस वक्त हुआ जब दूतावास में लोग वीजा संबंधी आवेदन देने के लिए कतारबद्ध हो रहे थे।

निशाने पर थे ब्रिगेडियर रवि दत्त मेहता : हमले का निशाना काबुल में भारत के सैन्य अताशे ब्रिगेडियर रवि दत्त मेहता थे। हमलावर ने विस्फोटकों से भरी कार अधिकारी की कार से भिड़ा दी थी।

हरियाणा के गुड़गांव निवासी ब्रिगेडियर मेहता का परिवार भी इन दिनों काबुल में उनके साथ था। सुरक्षा से जुड़े सूत्रों का मानना है कि यह हमला 2001 के बाद सबसे बड़ा और घातक है।

हमले का असर : सूत्रों के अनुसार, भारतीय दूतावास पर हुए आत्मघाती हमले के मद्देनजर अब भारतीय सुरक्षा विभाग अफगानिस्तान स्थित अपने सभी मिशनों की सुरक्षा और अधिक कड़ी करने जा रहा है।

भारत कड़े निर्णय लेकर अपने कुछ कार्यालयों को बंद भी कर सकता है। किसका हाथ : हमले के पीछे किसका हाथ है? इस सवाल को लेकर लोगों की राय भिन्न-भिन्न है। सूत्रों ने सीमा सड़क संगठन पर पूर्व में हुए हमलों के आधार पर पाकिस्तान का हाथ होने की आशंका जाहिर की है। वहीं, कुछ का मानना है कि इसके पीछे तालिबान का हाथ हो सकता है।

काबुल जाएगी टीम : विदेश मंत्री प्रणब मुखर्जी ने कहा, ‘आपात स्थितियों के मद्देनजर एक उच्च स्तरीय टीम को काबुल भेजने का निर्णय लिया गया है।’ मुखर्जी ने हमले की सूचना मिलते ही विदेश और रक्षा मंत्रालय के अधिकारियों की एक आपात बैठक बुलाई थी।

बच्ची का पता नहीं : घायलों में से काबुल इमर्जेसी अस्पताल में दो महिलाओं की मौत हो गई। इनमें से एक की गोद में बच्ची भी थी जो लापता है। घटनास्थल पर स्थानीय जवानों के साथ अमेरिकी सैनिक भी राहत व बचाव कार्य में लगे थे। वहां पर खून और क्षत-विक्षत शव पड़े थे जिनमें से ज्यादातर को पहचान पाना मुश्किल था।

मंडी का कमांडो रूप सिंह शहीद

नेरचौक (मंडी). काबुल में भारतीय दूतावास के गेट पर हुए आत्मघाती हमले में यहां का कमांडो रूप सिंह शहीद हो गया। बल्ह घाटी के ढाबण गांव के इस गबरू की शहादत की खबर जैसे ही यहां पंहुची पूरे क्षेत्र में मातम की लहर छा गई।

रूप सिंह इसी साल जनवरी में काबुल स्थित भारतीय दूतावास के सुरक्षा दस्ते में शामिल हुआ था। वह दस माह पहले पिता मुंशी राम का अंतिम संस्कार कर ड्यूटी पर गया था। घर में दुखद सूचना आते ही पुत्र ललित (13) और बेटी मीनाक्षी (11) बिलख पड़े। मुख्यमंत्री प्रेमकुमार धूमल ने शोक जताते हुए प्रभावित परिवार को हर संभव मदद का भरोसा दिया है।

बेटी को देखे बिना ही चला गया

दीनानगर (पठानकोट). काबुल के हमले में हवलदार अजय सिंह पठानिया (35) की शहादत की खबर मिलते ही काहनूवान में शोक छा गया। उसके भाई विजय पठानिया ने बताया कि पिछले शुक्रवार को हुई बातचीत में उसने जल्द लौटने का वादा किया था। उसके पिता हरदास सिंह पठानिया भी फौज में थे। बारहवीं करने के बाद अजय जालंधर में रिश्तेदारों से मिलने गया था तभी आईटीबीपी में चल रही भर्ती में उसकी सिलेक्शन हो गई।

अपनी 13 वर्ष की नौकरी के दौरान अफगानिस्तान जाने से पूर्व वह देश के नार्थ ईस्ट में तैनात था। फरवरी में उसको अफगानिस्तान भेजा गया। वहां जाने से पूर्व वह जनवरी के अंत में अपने परिजनों से अंतिम बार मिल कर गया था।

बाप को निहार न सकी बेटी
शहीद अजय और उसकी पत्नी पूनम के दो बच्चे हैं। बेटा अनिकेत पांच वर्ष का है, जबकि बेटी दो माह की है, जिसका अभी नाम भी नहीं रखा गया है। उसे प्रार्ची के नाम से पुकारा जाता है। प्राची को न तो बाप अजय सिंह देख पाया और न ही बेटी अपने पापा को देख पाई।





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