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सोलरस्टेट की राजधानी

बीकानेर. solar बीकानेर में लगातार रहने वाली तेज धूप और 49 तक पहुंचते तापमान की वजह से इस शहर को सोलर-स्टेट की राजधानी बनाया जा सकता है। हालांकि अभी इस दिशा में किसी ने भी गंभीरता नहीं दिखाई है लेकिन जयनारायण व्यास कॉलोनी में स्थापित ब्रम्हाकुमारी आश्रम पूरी तरह से सौर ऊर्जा से संचालित है जो पिछले आठ साल से यहां बिजली का स्विच तब ही ऑन किया जाता है जब सोलर सिस्टम डाउन होने लगता है। पूरे देश में ब्रम्हाकुमारी आश्रम के 60 केंद्र सौर ऊर्जा से संचालित हैं।

राजस्थान में एकमात्र बीकानेर केंद्र ही है जो सौर ऊर्जा से संचालित किया जा रहा है। जाहिर है कि बीकानेर में इस सिस्टम की सफलता को देखते हुए ही इसे यहां स्थापित किया गया है। इस आश्रम के अलावा जयपुर रोड के एक होटल में भी पानी गर्म करने के लिए सोलर प्लांट लगाया हुआ है और आंशिक रूप से कलेक्ट्रेट में भी सौर ऊर्जा से लाइट जलती है।

हालांकि बीकानेर के लंबे-चौड़े क्षेत्र को देखते हुए यह काफी कम है लेकिन सोलर प्लांट लगाने की प्रक्रिया काफी महंगी होने की वजह से अभी तक इसका प्रयोग प्रचलित नहीं हुआ है। इतिहास में देखा जाए तो बीकानेर के पुराने स्थापत्य में ऐसे उदाहरणों की भरमार है। हवेलियों में झरोखे, जालियां और रोशनी के अलावा सेंटर-लॉबी (खुला आंगन) का प्रावधान भी इसीलिए किया जाता रहा है कि पूर्ण प्रकाश रहे।

समय के बदलने के साथ सौर ऊर्जा प्रचलित तो हुई है लेकिन दूर-दराज के गांवों में भी सोलर प्लांट वहीं लगाए जा रहे हैं जहां बिजली की उपलब्धता बिल्कुल भी नहीं है। संभवतया इसका एकमात्र कारण इस प्लांट में इस्तेमाल होने वाली प्लेट्स का महंगा होना है। इसके अलावा ऐसी कोई भी वजह नहीं है जिसकी वजह से बीकानेर में सौर ऊर्जा के उपयोग को रोका जा सके। मौसम विभाग के प्रभारी अधिकारी बी.एल.मीणा बताते हैं कि बीकानेर सहित जोधपुर और जैसलमेर ऐसे इलाके हैं जहां सूरज का प्रकाश एक साल में नौ महीने से अधिक समय तक पूर्ण रूप से रहता है। प्रदेश में ये तीन जिले सौर ऊर्जा की दृष्टि से अधिक उत्पादन दे सकते हैं।

जोधपुर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड के अधीक्षण अभियंता एन.एम.चौहान के अनुसार शहर को प्रतिदिन 12 लाख यूनिट बिजली की जरूरत रहती है। इस रोशनी का 32 प्रतिशत घरेलू बिजली पर खर्च होता है और 34 फीसदी औद्योगिक इकाइयों में खर्च होता है। स्ट्रीट लाइट पर दो प्रतिशत बिजली खर्च होती है और इसके अलावा जलदाय विभाग, मिक्स लोड आदि पर बिजली खर्च होती है। अगर कोई उपभोक्ता अपने घर में सोलर-सिस्टम लगाता है तो उसे बिजली के बिल पर पांच पैसे प्रति यूनिट छूट मिलती है।

राजस्थान अगर सोलर-स्टेट बनता है तो बीकानेर और जैसलमेर प्रतिनिधि जिले होंगे। पश्चिमी राजस्थान इस क्षेत्र में मिसाल बन सकता है। यहां टेंप्रेचर भी अधिक रहता है और सन-लाइट भी अधिक समय तक रहती है। सौर-ऊर्जा के संचयन के लिए यह दोनों अनिवार्य तžव हैं। राजस्थान को सोलर-स्टेट बनाने का काम बीकानेर से ही शुरू करना चाहिए।
-आर.के.सुतार, वास्तुविद





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