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मीसा बंदियों की तलाश

जोधपुर. जिला प्रशासन को 1975 के आपातकाल के दौरान मीसा के तहत जेलों में बंद रहे लोगों की तलाश है। यह तलाश किसी पुराने प्रकरण मेंं नहीं बल्कि उन्हें पेंशन देने के लिए की जा रही है।

राज्य सरकार ने हाल ही इन्हें स्वतंत्रता सेनानियों की तर्ज पर पेंशन देने की घोषणा की है। राज्य सरकार की मीसा बंदियों को पेंशन देने की घोषणा के बाद जिला प्रशासन ने इनकी पूरे शहर में तलाश शुरू कर दी है।

केंद्रीय कारागार जोधपुर ने वर्ष 1975 से 1977 तक बंद रहे राजनीतिक बंदियों की सूची भेज दी है। इस सूची में 41 लोगों के नाम, पते, गिरफ्तारी के समय उनकी उम्र, गिरफ्तारी व रिहाई की तिथि बताई गई है।

प्रशासन ने इन नाम और पतों के आधार पर सभी मीसा बंदियों को पेंशन का आवेदन पत्र मय योजना के भेजा है। अब तक मात्र 12 लोगों ने इस पेंशन योजना में रुचि दिखाते हुए आवेदन किया है।

जिला प्रशासन को जेल से प्राप्त सूची के आधार पर अब तक 29 मीसा बंदियों को तलाश है। इनमें से कई मीसा बंदियों के निवास स्थान बदल गए हैं तो इनमें से कुछ की मृत्यु हो गई है, लेकिन इसकी प्रशासन के पास पुख्ता सूचना नहीं होने से परेशानी आ रही है। राज्य सरकार ने इस योजना के तहत पेंशन के लिए आवेदन की अंतिम तिथि 15 जुलाई रखी है।

इनकी है तलाश
उम्मेदराम जाट, रामनारायण विश्नोई, रेवाचंद लुहार, जालूराम कुम्हार, रामदयालसिंह, गुमानसिंह लोढ़ा, ज्येष्ठदान, केवलचंद, शंकरलाल, राजेंद्र गहलोत, कांतिलाल सोनी, बिरदमल सिंघवी, शंकरमल, लक्ष्मीचंद जैन, सरदार चरणसिंह, अ. गफूर, डूंगरसिंह, बाबूलाल, श्रीचंद,श्याम आर्य, ओमप्रकाश, हीराचंद बोहरा, कृष्ण मैमा, लालसिंह, कन्हैया नेणूमल सिंधी, मालाराम, मुरली मनोहर, पीके नरूका व महेंद्र नाथ अरोड़ा। इनमें से महेंद्र नाथ अरोड़ा समेत कई राजनीतिक बंदियों की मृत्यु हो चुकी है, लेकिन प्रशासन के पास इसकी पुख्ता सूचना नहीं है।

इन्होंने किया आवेदन
बीरबलराम, दामोदर माहेश्वरी, अमर किशन व्यास, सोहनराज, मेघसिंह, विज्ञान मोदी, ब्रह्मदेव बोड़ा, जुगल माहेश्वरी, देवराज बोहरा, मो. अली, मुरली बोहरा व जालूराम प्रजापत। इनमें से अधिवक्ता जालूराम प्रजापत की यह योजना लागू होने के 21 दिन बाद मृत्यु हो गई है। उनकी पत्नी को संभवत 20 दिन की पेंशन मिल सकेगी।

जिला कलेक्टर के निर्देश पर केंद्रीय कारागार से प्राप्त सूची के आधार पर सभी मीसा बंदियों को सूची में दिए गए पते के आधार पर आवेदन पत्र व योजना की प्रति भेजी गई है। इस योजना में अब तक करीब एक दर्जन आवेदन प्राप्त हुए हैं।इन आवेदनों को राज्य सरकार के पास पेंशन के लिए भेजा गया है।
—दुर्गेश कुमार बिस्सा, एडीएम सिटी, जोधपुर





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