कोटा. राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय में सेवारत 56 व्याख्याताओं की हालत इन दिनों ‘नौ दिन चले अढाई कोस.’ जैसी हो रही है। इनमें से कुछ तो ऐसे हैं जिन्हें 10 साल बाद अप्रैल में राज्य सरकार से पदोन्नति का तोहफा तब मिला, जब वे उसी वेतनमान पर पहुंच गए।
मुश्किल यहीं खत्म नहीं हुई, हाल ही में उनको नियुक्ति तिथि से नए वेतनमान लाभ देने पर वित्त अधिकारी ने नियमों का हवाला देकर रोक लगा दी है, नतीजन वे इसका लाभ नहीं ले सके। विवि की चयन समिति ने असिस्टेंट प्रोफेसर से एसोसिएट प्रोफेसर के 40 और एसोसिएट प्रोफेसर से प्रोफेसर के 16 पदों पर पदोन्नति के प्रस्ताव वित्त समिति और प्रबंध मंडल की स्वीकृति के बाद राज्य सरकार को भेजे थे, जिसे वित्त विभाग ने मंजूरी देते हुए प्रशासनिक विभाग को तत्काल भुगतान करने के निर्देश दिए थे।
विश्वविद्यालय में प्रोफेसर पर्याप्त होंगे तभी यूजीसी से बड़े प्रोजेक्ट के लिए बजट मिल सकता है, प्रमोशन में 10 साल की देरी से राज्य सरकार को सीधा नुकसान हो रहा है। विवि को सामंजस्य के साथ संचालित करने के लिए वित्त विभाग को सहयोगी रवैया अपनाना होगा।
—डॉ. आरसी मिश्रा, प्रो वाइस चांसलर
व्याख्याताओं का पलायन शुरू
विवि के संघटक कॉलेज में समय पर पदोन्नति नहीं मिलने से निराश होकर व्याख्याता एनके गुप्ता ने अप्रैल-08 और राजीव गुप्ता ने मई-08 में सेवा से तीन साल का अवकाश लेकर निजी कॉलेजों में ऊंचे पद और वेतन पर ज्वाइन कर लिया।
डॉ. राजेश सिंघल ने बताया कि उनका चयन डीपीपीआई में महाप्रबंधक के पद पर हुआ था, लेकिन विवि में स्टाफ की कमी के कारण उन्हें रिलीव नहीं किया गया। 18 साल तक प्रमोशन नहीं मिलने से पूर्व में दो लेक्चरर वीके गुप्ता और रजत रस्तोगी भी आईआईआईटी में प्रोफेसर के पद पर ज्वॉइन कर चुके हैं। इनके अलावा डॉ.एमएल गुप्ता, डॉ.एमसी चौबे, डॉ. धनंजय गुप्ता पहले ही स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले चुके हैं। इंजीनियरिंग कॉलेज से पिछले 4 साल में 10 प्रोफेसर और 2 रीडर सेवानिवृत्त हुए हैं, लेकिन भविष्य के लिए नई फेकल्टी टीम तैयार करने की दिशा में कोई ठोस प्रयास नहीं किए जा रहे हैं।
क्या है कॅरिअर एडवांसमेंट स्कीम
राज्य के सभी विश्वविद्यालयों में एआईसीटी और यूजीसी के नियमानुसार 27 अक्टूबर 1999 से कॅरिअर एडवांसमेंट स्कीम लागू की गई, जिसमें प्रोफसर पद पर 19 मई-2001 से नए वेतनमान लाभ देने का प्रावधान है। जयनारायण व्यास विवि जोधपुर, महाराणा प्रताप कृषि विवि उदयपुर, वर्धमान महावीर खुला विवि कोटा सहित कई अन्य विवि ने इसी आधार पर पदोन्नति लाभ दिए हैं।
यह स्वायत्तता को खुली चुनौती
- प्रो.बीएल वर्मा, पूर्व कुलपति, कोटा विश्वविद्यालय
राज्य के सभी विश्वविद्यालयों को जिस उद्देश्य के लिए बनाया गया है, उसे पूरा करने के लिए इन्हें संसाधनों से विकसित करना राज्य सरकार का दायित्व है अन्यथा सबको सस्ती उच्च शिक्षा देने का सपना टूट जाएगा। जब विवि में क्वालिटी टीचर्स नहीं होंगे तो वहां छात्र भी नहीं आएंगे, इससे निचले तबके के प्रतिभावान छात्रों को ज्यादा नुकसान होगा।
सरकार दूसरे कार्र्यो में कई गुना ज्यादा खर्च कर रही है, लेकिन उच्च शिक्षा में धन की कटौती करने से उद्देश्य पूरा नहीं हो सकेगा। आज विश्वविद्यालयों में ऑटोनामी का कंसेप्ट ही खत्म हो रहा है। ब्यूरोक्रेसी कुलपति पर हावी होरही है। एक्ट में प्रावधान है कि प्रबंध मंडल के निर्णय सर्वमान्य होते हैं, इनको नहीं मानना नियमविरूद्घ है और स्वायत्तता को खुली चुनौती है।