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एक हजार पर मात्र 7 वैज्ञानिक

उदयपुर. कनाडा में प्रति एक हजार की आबादी पर साइंस और टेक्नॉलोजी से जुड़े 180.66 कार्मिक हैं। रशिया में यह अनुपात 112.77 है, जबकि अमेरिका में 21.15 है। इनके बनिस्पत भारत में केवल 7.8 कार्मिक प्रति हजार की आबादी पर उपलब्ध है। साइंस बेस में यह कमी एक बड़ी चुनौती है। साइंस को बतौर कैरियर अपनाने के लिए प्रोत्साहन देना चाहिए।

शांतिपीठ की ओर से रविवार को आरएनटी मेडिकल कॉलेज सभागार में आयोजित 8वीं प्रो.डी.एस.कोठारी स्मृति व्याख्यानमाला में रक्षामंत्री के वैज्ञानिक सलाहकर व रक्षा विभाग के रिसर्च एंड डेवलपमेंट विभाग के सचिव एम.नटराजन ने यह उद्बोधन दिया। उन्होंने आगे कहा कि करीब 100 विदेशी कंपनियों ने देशभर में अपने रिसर्च और विकास यूनिट स्थापित किए हैं जो यह दर्शाता है कि भारत में साइंटिफिक टेलेंट की कमी नहीं। लेकिन इसका लाभ देश को नहीं, विदेशियों को मिल रहा है। श्रोताओं ने व्याख्यान के बाद सवाल-जवाब भी किए। आरंभ में शांतिपीठ के संस्थापक अनंत गणोश त्रिवेदी ने स्वागत किया।

विश्वविद्यालयों की बड़ी भूमिका : नटराजन ने शिक्षकों का आह्वान करते हुए कहा कि देश में 302 यूनिवर्सिटी, 13 राष्ट्रीय उच्च शिक्षण केन्द्र और 16 हजार कॉलेज पर क्वालिटी शिक्षा का भार है। युवा पीढ़ी को मूल्य आधारित गुणवत्ता युक्त शिक्षा देने का दायित्व शिक्षकों पर है। डीआरडीओ के चीफ कंट्रोलर डा. डब्ल्यू सेल्वामूर्ति ने कहा कि संस्थान अपनी क्षमताओं का इस्तेमाल सामुदायिक सेवा के लिए कर रहा है।

हंसते रहो, अच्छे से पढ़ो : डीआरडीओ के वैज्ञानिकों ने लेकसिटी के विद्यार्थियों को खुश रहने की सीख दी। शांतिपीठ परिसर में बच्चों से संवाद करते हुए चीफ कंट्रोलर डा.सेल्वामूर्ति ने कहा मानव जन्म लेकर दुखी होने की कोई वजह नहीं है। भगवान ने कुत्ते-बंदर बनाए, लेकिन उसने तुम्हें 6 इन्द्रियों वाला समझदार मनुष्य बनाया। इतना सुंदर शरीर दिया। 6 बिलियन लोगों में 26 प्रतिशत विमंदित श्रेणी में हैं। बाकी में 27 प्रतिशत निरक्षर हैं। बच्चों, तुम भाग्यशाली हो कि तुम्हें स्वस्थ शरीर और शिक्षा का अवसर मिल रहा है।





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