उदयपुर. मेवाड़ में अरावली पर्वतमाला और मारवाड़ के मैदानी इलाकों के बीच फॉल्ट जोन में बढ़े दबाव से ही राजसमंद और भीलवाड़ा जिले में स्थित कालीगुमान फॉल्ट में भू-गर्भी हलचल हो रही है। यही कारण है कि इस क्षेत्र में एक सप्ताह में दो बार भूकंप के झटके महसूस किए गए हैं।
भू-वैज्ञानिकों के अनुसार अरावली पवर्तमाला और मारवाड़ के मैदानी इलाकों के बीच बड़ा फॉल्ट (भूमि में दरार) है जो सीधा हिमालय रेंज से जुड़ा है। इंडियन प्लेट के ऊपर (एशिया जोन) बढ़ने के कारण इस फॉल्ट पर दबाव पड़ता है, जिससे भूकंप के झटके महसूस किए जा रहे हैं।
राजसमंद, पाली और भीलवाड़ा में एक सप्ताह में दो बार महसूस किए गए भूकंप के झटकों से लगता है कि अरावली पर्वतमाला और मैदानी इलाके के बीच दरारों पर पड़े दबाव का असर राजसमंद और भीलवाड़ा क्षेत्र में भी कालीगुमान फॉल्ट में पड़ा है, जिससे इन क्षेत्रों में झटके महसूस किए जा रहे हैं। दोनों के बीच गहराई में कहीं न कहीं लिंक होने से हलचल हुई है।
दोनों बार भूकंप में समानता : मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार शनिवार को भीम, ब्यावर, पाली, भीलवाड़ा में और 27 जून को पाली, राजसमंद और उदयपुर में महसूस किए भूकंप में समानता थी। दोनों भूकंप की रिक्टर पैमाने पर तीव्रता 3.6 रिकार्ड की गई। इनका केंद्र 25.8 डिग्री नॉर्थ और 74.2 डिग्री के आसपास था। पहले वाले भूकंप की गहराई 5 किमी और भीलवाड़ा में केंद्रित भूकंप की गहराई 10 किमी रही।
हल्के झटके आते रहेंगे तो नहीं होगा विनाश : सुखाड़िया यूनिवर्सिटी के भू-विज्ञान विभाग के डा. हर्ष भू ने बताया कि जमीन में बनने वाला प्रेशर इस प्रकार धीरे-धीरे रिलीज होता रहा तो विनाशकारी भूकंप नहीं आएगा। यह प्रेशर रिलीज नहीं हुआ और एक जगह इकट्ठा होता रहा तो ज्यादा प्रेेशर से विनाशकारी भूकंप आने की आशंका बन जाती है। इंडियन प्लेट के निरंतर आगे बढ़ने के कारण मैदानी इलाके में स्थित फॉल्ट पर निरंतन प्रेशर बढ़ता जा रहा है। इसका संबंध कालीगुमान क्षेत्र से होने के कारण राजसमंद जिले में भूकंप के झटके महसूस हो रहे हैं।
यहां है फॉल्ट : मेवाड़ और मारवाड़ के बीच अलग-अलग चट्टानें होने और हिमालयन रेंज का निरंतर प्रेशर पड़ने से बड़ा फॉल्ट जोन विकसित हो गया है। इस क्षेत्र में स्थित दरारें और चौड़ी होती जा रही हैं। इन दरारों के अधिकतम चौड़ाई वाले हिस्से पर पाली, सिरोही, जोधपुर, बाड़मेर और जैसलमेर हैं। कालीगुमान फॉल्ट से इनका लिंक होने से राजसमंद और भीलवाड़ा जिला संवेदनशील बन गया है। चित्तौड़गढ़ जिले में भूगर्भीय दरारें पाई गई हैं। सुखाड़िया यूनिवर्सिटी में ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम (जीपीएस) के माध्यम से भूगर्भीय अध्ययन किया जा रहा है।