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यूनिवर्सिटी एक नियम दो..!

उदयपुर. सुखाड़िया यूनिवर्सिटी में अलग-अलग नियमों का खामियाजा बीकॉम के छात्रों को भुगतना पड़ा है। यूनिवर्सिटी में बीकॉम तथा बीए, बीएससी में मूल्यांकन के नियम अलग-अलग हैं। बीकॉम का रिजल्ट बिगड़ने का एक कारण मार्किग नियमों में बदलाव होना बताया गया है। इसके अलावा कापियों के जांचने में गड़बड़ी की आशंका भी है।

सुखाड़िया यूनिवर्सिटी में वर्ष 2000 में तत्कालीन कुलपति प्रो. एके सिंह के कार्यकाल में परीक्षा मूल्यांकन के नियमों में बदलाव हुआ था। श्री सिंह ने बीकॉम, बीएससी, बीए और लॉ में किसी भी एक विषय के सभी पेपर (फस्र्ट, सैकंड व थर्ड पेपर) के कुल प्राप्तांकों की जोड़ के आधार पर छात्र को उस विषय में पास या फेल किए जाने का नियम लागू किया। इस नियम को लेकर यूनिवर्सिटी में मतभेद खड़े हो गए।

कामर्स व साइंस के कुछ शिक्षक इस नियम से सहमत नहीं थे जबकि आर्ट्स के शिक्षक इस नियम के पक्षधर थे। काफी बहस के बाद यह मामला एकेडमिक कौंसिल तक गया। कौंसिल ने आर्ट्स व साइंस में तो नियम यथावत रखा गया लेकिन कामर्स संकाय में पूर्व वाली व्यवस्था लागू कर दी। इसका यूनिवर्सिटी द्वारा प्रचार नहीं किया गया, केवल सिलेबस में इसका उल्लेख किया गया जिसे अधिकांश छात्र पढ़ नहीं पाते। इसका असर यह हुआ कि हाल ही घोषित हुए रिजल्ट में सैकड़ों छात्रों को कंपार्टमेंट मिला है। बीकॉम के करीब ढाई हजार छात्रों को कंपार्टमेंट मिलने से उनके भविष्य का सवाल खड़ा हो गया है।

मूल्यांकन के अलग अलग मापदंड : नए नियम से कॉमर्स में एक ही विषय के दो पेपर में न्यूनतम पासिंग मार्क लाना अनिवार्य होता है। इधर, कंपार्टमेंट मिलने से अंतिम वर्ष के छात्रों के लिए भारी परेशानी हो गई है। प्रथम व द्वितीय वर्ष के छात्र तो उस विषय का पेपर अगली कक्षा के साथ दे सकेंगे लेकिन अंतिम वर्ष के छात्रों को डिग्री हासिल करने के लिए सप्लीमेंट्री परीक्षा में शामिल होना होगा। इसके चलते वे प्रतियोगी व अन्य परीक्षाओं से वंचित हो जाएंगे।

कापियां जांचने में गड़बड़ी की अशंका : सर्वाधिक कंपार्टमेंट की शिकायत प्रथम व द्वितीय वर्ष में है तथा यह ज्यादातर चार, पांच कॉलेज में ही है। महाविद्यालयों के प्रशासन को आशंका है कि कहीं न कहीं कापियां जांचने में चूक, गड़बड़ी हुई है। यदि यूनिवर्सिटी रिवेल्यूवेशन कराती है तो स्थिति साफ हो सकती है।

किस संकाय में क्या नियम बीए व बीएससी : बीए, बीएससी में एक विषय के दो पेपर के अंकों के कुल जोड़ को न्यूनतम पासिंग मार्क्‍स का आधार माना जाता है। यदि बीए में किसी छात्र ने इतिहास के पहले प्रश्नपत्र में पूर्र्णाक 50 में से 10 अंक प्राप्त किए लेकिन इतने ही अंकों के दूसरे प्रश्न पत्र में 45 अंक प्राप्त कर लिए तो प्रथम व द्वितीय प्रश्नपत्र में कुल जोड़ 55 अंकों के आधार पर उसे उस विषय में पास कर दिया जाता है।

बीकॉम : बीकॉम में एक विषय में पास होने के लिए उसके फस्र्ट व सेकंड दोनों ही पेपर में न्यूनतम पासिंग मार्क लाना अनिवार्य होता है। उदाहरण - बीकॉम में यदि बैकिंग के प्रथम प्रश्नपत्र में किसी छात्र ने पूर्र्णाक 50 में से 10 अंक हासिल किए और दूसरे प्रश्न पत्र में भले ही 45 या इससे भी अधिक अंक पाए हों उसे पास नहीं किया जाता है। पास करने के लिए इस विषय के दोनों ही पेपर में न्यूनतम अंक 17-17 लाना अनिवार्य है।

कॉमर्स के दृष्टिकोण से कॉमर्स में जो नियम है, वह उचित है। जहां तक कॉमर्स के छात्रों को कंपार्टमेंट मिलने का सवाल है तो नियम इसका कारण नहीं हो सकता है। अन्य कोई कारण हो सकता है यूनिवर्सिटी द्वारा पुनमरूल्यांकन कराकर कंपार्टमेंट वाली समस्या का निराकरण कराया जा सकता है।
- प्रो. विजय श्रीमाली, डीन लॉ कॉलेज

यूनिवर्सिटी में संकायवार अलग-अलग नियम हो सकते हैं। यह विषय की विशेषता के आधार पर निर्धारित किए जाते हैं। छात्रों को नियमों की जानकारी रखना चाहिए ताकि अध्ययन की तैयारी उसी के अनुरूप हो। हालांकि सर्वसम्मत विकल्प खोजकर नियम एक-सा भी किया जा सकता हैं।
प्रो. आरएन व्यास, डीन आर्ट्स कॉलेज

राजस्थान की सभी यूनिवर्सिटी में मूल्यांकन के लिए कॉमर्स कॉलेज वाला ही नियम है। कॉमर्स कॉलेज में जो नियम लागू किया गया है, वह नया नहीं बल्कि यूनिवर्सिटी की स्थापना के समय से ही था। छात्रों का स्तर बनाए रखने के लिए मूल्यांकन की यही सही व्यवस्था है। कुछ वर्ष पहले इस नियम को बदलना गलत था। छात्रों के कंपार्टमेंट के लिए यह नियम जिम्मेदार हो ऐसा नहीं हो सकता है।
- प्रो. कैलाश सोडानी, डीन कामर्स कॉलेज





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