उदयपुर.
गीतांजलि इंजीनियरिंग कॉलेज के ऑटोमोबाइल इंजीनियरिंग के छह स्टूडेंट्स ने वन सीटर स्पेशल रेसिंग कार तैयार की है। शहर की पहली ऐसी रेसिंग कार (गो-कार्ट) इंजीनियरिंग स्टूडेंट्स ने चार साल के अध्ययन के बाद ऐसी परिस्थिति में तैयार की है जब स्पेशल प्रोजेक्ट में बताने पर अध्यापकों ने ही ऐसा संभव होने से इंकार कर दिया था।
गीतांजलि इंजीनियरिंग कॉलेज में फोर्थ सेमेस्टर पूरा कर चुके गौरव सिंघवी, रवि जोशी, सौरभ भाटी, कल्पेश पालीवाल, सास्वत त्रिपाठी व मोहम्मद अजरुद्दीन ने सेमेस्टर से पहले मिले प्रोजेक्ट में यह कार तैयार की है। करीब पचास हजार लागत से तैयार हुई रेसिंग कार को डेढ़ महीने की मेहनत के बाद तैयार किया गया, जिसमें कायनेटिक होंडा स्कूटर का इंजन काम लिया गया। कबाड़ से खरीदे उस स्कूटर के चेचीस को मोडिफाइड कर रेसिंग कार का लुक दिया गया।
गौरव ने बताया कि रेसिंग कार का नाम ‘उम्फ’ रखा गया है। यह नाम लेटिन भाषा से लिया गया है। कार साठ किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से चलाना संभव है। इसका एवरेज भी 35 किलोमीटर प्रति लीटर आंका गया है। चैन ड्राइव कार में सनी मोपेड के व्हील उपयोग में लिए गए हैं। इसका इंजन 110 सीसी का है।
कोई फिसलन नहीं : कार में एक्सीलेटर और ब्रेक पैरों में दिए है। रिवर्स गियर नहीं होने से कार का निचला हिस्सा खुला छोड़ा गया है जिससे उसे पैरों से खिसकाकर पीछे लेना संभव है। कार को नाव की आकृति का लुक दिया गया है। इसके अलावा इसकी फ्यूल केपीसिटी साढ़े पांच लीटर की है। बेट्री लगाकर कार को सेल्फ स्टार्ट किया जा सकता है।
अब मेटेरियल कार तैयार करेंगे : इंजीनियरिंग स्टूडेंट ने बताया कि आर्डर मिलने पर शहर की मॉल या हॉस्पिटल के लिए ऐसी कार तैयार करेंगे जिसमें मेटेरियल सप्लाई किया जा सके। इसके अलावा गोल्फ कोर्स में भी इस कार का उपयोग संभव है। इस कार को तैयार करने में स्टूडेंट्स को फाइनेंशियल मदद सिंघवी केमीकल्स ने दी, जबकि मॉडल तैयार के लिए पिंक इंजीनियरिंग कापरेरेशन का सहयोग मिला।