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बर्खास्त पुलिसवाले कर रहे लूट खसोट

जालंधर. राज्य में बर्खास्त पुलिसकर्मियों और पुराने आतंकियों ने मिलकर गिरोह बना लिया है। इस गिरोह ने पुराने शातिर अपराधियों के साथ मिलकर राज्य में बैंक डकैती जैसी वारदातें शुरू कर दी हैं। अमृतसर और बठिंडा में पिछले दिनों हुई बैंक डकैतियों में इसी गिरोह का हाथ माना जा रहा है।

पुलिस के पास पुख्ता सूचनाएं है कि यह गिरोह राज्य में बैंकों को निशाना बना सकता है। इसी वजह से राज्य में बैंकों की सुरक्षा बढ़ा दी गई है। राज्य के डीजीपी एन.पी.एस. औलख ने सभी जिलों के एसएसपी को इन तीनों की गतिविधियों पर नजर रखने के निर्देश दिए हैं। पिछले कुछ समय में ऐसे कई मामलों का खुलासा हुआ है जिन्हें पुराने आतंकियों और बर्खास्त पुलिसकर्मियों ने एक साथ मिलकर अंजाम दिया। इस गिरोह के कारण राज्य में अपराध तेजी से बढ़ रहे हैं।

नशीले पदार्र्थो की बढ़ती तस्करी के लिए इसी गठजोड़ को जिम्मेदार माना जा रहा है। हेरोइन की बढ़ती तस्करी से तो केंद्रीय एजेंसियां भी चिंतित हैं। खुफिया एजेंसियों से मिली जानकारी के अनुसार, पंजाब में 1376 बर्खास्त पुलिसकर्मियों, 978 पुराने आतंकियों और अपराधियों के 27 गैंग एक्टिव हैं, जो बैंक लूटने और डकैती से लेकर कई आपराधिक कार्र्यो में लिप्त हैं। दिल्ली, उत्तरप्रदेश, बिहार और मुंबई में सक्रिय अपराधियों से इनके तार जुड़े हुए हैं। सूत्रों के मुताबिक, गिरोह को राज्य के कुछ राजनेताओं का संरक्षण भी मिला हुआ है। जिला परिषद, पंचायत और नगर पालिका चुनाव में यह गिरोह काम कर चुका है।

बैंक हैं निशाने पर : 2002 के बाद से ही अपराधी खुद को सक्रिय करते जा रहे हैं। बीते साढ़े छह वर्र्षो में राज्य में बैंक लूट की 116 वारदातें हो चुकी हैं।

हालांकि इन वारदातों को अंजाम देने वाले 21 गिरोहों का पुलिस सफाया कर चुकी है लेकिन जेल से रिहा होने के बाद अपराधी दोबारा सक्रिय हो जाते हैं। बर्खास्त पुलिसकर्मी डिपार्टमेंट के काम करने के तरीके से अच्छी तरह वाकिफ होते हैं इसलिए आसानी से पकड़ में नहीं आते।

पंजाब के डीजीपी एन.पी.एस. औलख ने बताया कि बर्खास्त पुलिसवालों ने पुराने आतंकियों और अपराधियों से मिलकर कई गिरोह बना लिए हैं। पुलिस इन पर नजर रख रही है।





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