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दरबार साहिब में पाठ 7साल करें इंतजार

अमृतसर. गोल्डन टैंपल के नाम से दुनियाभर में मशहूर श्री दरबार साहिब में गुरुग्रंथ साहिब का अखंड पाठ कराने वाले श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। आस्था का आलम यह है कि यहां अखंड पाठ कराने के लिए जो श्रद्धालु आज अपना नाम दर्ज कराएगा उसे लगभग सात साल तक इंतजार करना पड़ेगा, क्योंकि यहां 2014 तक अखंड पाठ की एडवांस बुकिंग हो चुकी है।

दरबार साहिब परिसर में हर रोज 60 से अधिक अखंड पाठ होते हैं। दरअसल, अकाल तख्त साहिब के पीछे गुरुद्वारा बाबा गुरबख्श सिंह के पुन: निर्माण ने अखंड पाठ के विस्तार में बड़ी अहम भूमिका निभाई है। तीन साल पहले यहां बने 48 कमरों में से अधिकांश में अब अखंड पाठ होते हैं। इससे पहले समूचे परिसर में 24 जगहों पर ही ऐसे धार्मिक आयोजनों की सुविधा मुहैया थी। ज्यादातर श्रद्धालु दरबार साहिब में हर की पौड़ी और परिक्रमा में स्थित दुखभंजनी बेरी पर ही पाठ कराने की इच्छा लेकर आते हैं।

इन दोनों पवित्र स्थलों पर अखंड पाठ कराने वालों में उद्योगपति अनिल अंबानी, अमिताभ बच्चन के पुत्र अभिषेक बच्चन, बेटी श्वेता नंदा और अक्षय कुमार जैसे अतिविशिष्ट लोगों के नाम शामिल हैं। इसके अलावा सैंकड़ों की संख्या में देश और दुनिया के कई बड़े लोग यहां अखंड पाठ करवा चुके हैं। दरबार साहिब के मैनेजर हरभजन सिंह के अनुसार गुरु के घर में छोटे-बड़े, अमीर-गरीब सब बराबर हैं इसीलिए अखंड पाठ के लिए सबको अपनी बारी का इंतजार करना पड़ता है। लोगों के नाम एक रजिस्टर में दर्ज होते हैं, वीआईपी लोगों के लिए कोई अलग सूची नहीं है।

दरबार साहिब का कामकाज चलाने वाली शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के मीडिया इंचार्ज राम सिंह ने बताया कि बारी आने पर पाठ की सूचना संबंधित श्रद्धालु को कई दिन पहले भेज दी जाती है, जो लोग किसी कारणवश खुद नहीं आ पाते हैं वे अपने किसी रिश्तेदार या परिचित को भेज देते हैं।

दरबार साहिब की दर्शनी ड्योढ़ी पर अखंड पाठ की बुकिंग की व्यवस्था है। यहां के एक सेवादार के मुताबिक 3100 रुपए जमा कराकर पाठ की बुकिंग कराई जा सकती है। राशि नकद, मनीऑर्डर, बैंक ड्राफ्ट या ई-बैंकिंग के जरिये भेजी जा सकती है। इसमें प्रसाद और रूमाले का प्रबंध और पाठ करने वाले ग्रंथियों का पारिश्रामिक शामिल है। दर्शनी ड्योढ़ी में हर समय पाठ कराने वाले श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रहती है। एक अखंड पाठ 48 घंटों में होता है, इसे आठ पाठी पौने पौने घंटे की आठ पालियों में पूरा करते हैं।





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