Business
Dalal Street Dalal Street मुंबई.
पिछले कुछ सत्रों से गिरावट के शिकार चल रहे देश के शेयर बाजारों ने सोमवार को लगातार दूसरे दिन राहत की सांस ली। दिनभर अच्छी उछाल दर्ज कराने वाला सेंसेक्स कारोबार की समाप्ति से ठीक पहले बिकवाली के दबाव बनने के बावजूद 72 अंक की बढ़त हासिल करने में कामयाब रहा।
शाम को यह 13526 के स्तर पर बंद हुआ। निफ्टी में भी 14 अंक की बढ़त रही और यह 4030 के स्तर पर बंद हुआ। कारोबारियों ने बताया कि महंगाई पर नियंत्रण पाने के लिए रिजर्व बैंक अगली मौद्रिक नीति की समीक्षा में और सख्त कदम उठा सकता है। इस चिंता में दोपहर बाद अचानक बिकवाली का दबाव देखा गया। विश्लेषकों का कहना है कि चिंताएं अभी भी बनी हुई हैं। उनके मुताबिक निवेशकों को इस समय ज्यादा सतर्कता बरतने की जरूरत है।
आधे घंटे में 250 अंक लुढ़का
सत्र के दौरान सेंसेक्स में अस्थिरता के बीच हर ऊंचाई पर मुनाफावसूली का रुख देखा गया। दिनभर के कारोबार में मजबूती दिखाने वाला सेंसेक्स सत्र की समाप्ति से ठीक पहले बिकवाली का दबाव बनने से अचानक लड़खड़ा गया। तीन बजे के बाद करीब आधे घंटे के कारोबार में सेंसेक्स में 250 अंक की गिरावट देखी गई।
क्या होगा
ओक्सस इन्वेस्टमेंट के चेअरमैन सुरजीत भल्ला की राय में भारतीय शेयर बाजार मौजूदा स्तरों पर इतना आकर्षक हो गया है जितना दो-तीन हफ्ते पहले नहीं था। उनके मुताबिक बाजार के ज्यादा गिरने की संभावना नहीं है, लेकिन तेजी के लिए क्रूड की कीमतें विश्व बाजार में नीचे आना जरूरी हैं।
फस्र्ट ग्लोबल की देविना मेहरा का कहना है कि बाजार इस समय मंदी के दौर से गुजर रहा है। इस लिहाज से कम से कम अगले एक साल तक हमें नकारात्मक रिटर्न देखने को मिल सकता है। बाजार में अभी और गिरावट बाकी है। सेंसेक्स 10,000 से 11,000 का स्तर छू सकता है।
क्या करें निवेशक
कोटक सिक्यूरिटीज के पीएमएस के एसवीपी कुंज बंसल ने रिजर्व बैंक की आगामी मौद्रिक नीति सख्त रहने के आसार देखते हुए निवेशकों को ब्याज दरों के प्रति संवेदनशील शेयरों से बाहर निकलने की सलाह दी है। ब्रोकरेज फर्म शेयर खान के विश्लेषक अनूप चांडक को मंगलवार को पुलबैक रैली जारी रहने की उम्मीद है। उनके मुताबिक निफ्टी 4,200 का स्तर छू सकता है। आईटी शेयरों में तेजी देखने को मिल सकती है।
भारतीय कंपनियों की आमदनी पर लग सकता है ग्रहण
मुंबई . क्रूड की कीमतों में जारी उछाल व ऊंची ब्याज दरें चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में भारतीय कंपनियों की कमाई पर ग्रहण लगा सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि वर्ष 2007-08 में तगड़ा मुनाफा कमा चुकी भारतीय कंपनियों को अब कम में ही संतोष की आदत डाल लेना चाहिए।
आमदनी और लाभ को झटका : ब्रोकरेज फर्म्स का कहना है कि पहली तिमाही में कंपनियों की कर, ब्याज, अवमूल्यन से पूर्व की आमदनी में गिरावट देखने को मिल सकती है। परिशोधन मार्जिन घटने की भारी आशंका है। परिशोधन मार्जिन से ही कंपनी के लाभ का आंकलन होता है।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ
घटेगा मुनाफा : ‘कंपनियों के मुनाफे के मार्जिन में १३क् बेसिस प्वाइंट की संभावना है। सभी कंपनियों का मार्जिन समान रूप से २२.२ फीसदी रहेगा, लेकिन बैंकों को छोड़ दिया जाए तो यह २क् फीसदी ही रहने का अनुमान है।’
-अमिताभ चक्रवर्ती, रिसर्च हेड रेलीगेयर सिक्यूरिटीज
कंपनियों की हालत पतली: ‘कमोडिटी की लागत बढ़ने से मैन्यूफैक्चर्स की दिक्कतें बढ़ गई हैं। ब्याज व टैक्स की पेमेंट बढ़ने से इनकी हालत और पतली नजर आ रही है।’
-दीपक जसानी, रिसर्च हेड, एचडीएफसी सिक्यूरिटीज