बीकानेर. पेंशनर्स को अब दवाइयां बाजार में निजी मेडिकल स्टोर पर मिलेंगी। जिले में निजी मेडिकल व्यवसायियों को यह काम ठेके पर दिया जा रहा है। इस प्रक्रिया से सहकारी उपभोक्ता होलसेल भंडार को बड़ा झटका लगा है।
पेंशनर्स को वित्त वर्ष 2008-09 के लिए पेंशनर्स चिकित्सा रियायती योजना के तहत एलोपैथिक दवाइयां उपलब्ध करवाने का ठेका जिले में 50 से अधिक निजी दवा व्यवसायियों को देने की तैयारी की जा रही है। इसके लिए योजना के सचिव जिला कोषाधिकारी ने निविदाएं भी आमंत्रित कर ली हैं। यह निविदाएं 20 जुलाई के बाद खोली जाएंगी।
योजना के अनुसार यह काम विक्रेता फर्म द्वारा क्रय की गई जेनरिक दवा के क्रय मूल्य पर न्यूनतम लाभ प्रतिशत की दर देने वाली फर्म को दिया जाएगा। एलोपैथिक ब्रांडेड दवा के मामले में निर्माता को दवाई के मुद्रित खुदरा विक्रता को क्रय मूल्य पर अधिकतम छूट भी देनी होगी। योजना के तहत जिला मुख्यालय पर जिला अस्पताल व पीबीएम अस्पताल के पास ऐसी तीन-तीन दुकानों को काम मिलेगा, जिनकी सालाना बिक्री कम से कम दस लाख रुपए है। इसके अलावा अणचा बाई, भुजिया बाजार और फोर्ट डिस्पेंसरी के पास भी एक-एक दुकान स्वीकृत की जाएगी।
ग्रामीण क्षेत्रों में नोखा, श्रीडूंगरगढ़, कोलायत सहित प्रत्येक सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र के पास भी पेंशनर्स शॉप खुलेंगी। यह नई व्यवस्था पेंशनर्स के लिए कितनी लाभदायक साबित होगी, इसका पता दुकानें खुलने के बाद ही चल सकेगा लेकिन इतना जरूर है कि ग्रामीण क्षेत्र के पेंशनर्स को दवाइयां लेने के लिए शहर में नहीं आना पड़ेगा। वर्तमान में उनका पूरा दिन पीबीएम अस्पताल में खराब होता है।
पेंशनर्स शॉप पर लगी लंबी कतार और पूरी दवाइयां नहीं मिलने के कारण उन्हें काफी परेशानी उठानी पड़ती है। यह समस्या उन ग्रामीणों के साथ आ रही है, जिनके गांवों में पेंशनर शॉप नहीं है। इस नई व्यवस्था से पेंशनर समाज खुश है, वहीं इसका विरोध भी हो रहा है। शहर भाजपा अध्यक्ष नंदकिशोर सोलंकी, मीना आसोपा, भाजपा पेंशनर प्रकोष्ठ ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर सहकारी उपभोक्ता होलसेल भंडार से ही दवाइयों की आपूर्ति चालू रखने की मांग की है। पेंशनर्स की दवाइयों के लिए प्राइवेट दुकानों को अधिकृत करने के फैसले को उन्होंने पेंशनर्स के हितों के खिलाफ बताया है।
इनका कहना है
यह सही है कि पेंशनर्स को दवाइयों की बिक्री का काम निजी हाथों में जाने से भंडार को काफी नुकसान होगा। बिक्री पर असर पड़ेगा लेकिन भंडार अपनी सेवा के साथ अन्य व्यवसाय को बढ़ाने की कोशिश करेगा। दवाइयों के कैश काउंटर पूर्व की भांति चलते रहेंगे।
-शिवजीराम चौपड़ा, मुख्य महाप्रबंधक, होलसेल भंडार
सरकार के इस निर्णय से पेंशनर्स को दवाइयों के लिए भटकना पड़ेगा। निजी दुकानदारों की मोनोपोली हो जाएगी। सरकार को इससे कोई फायदा नहीं होगा, बल्कि सोसायटी टूट जाएगी।
-श्रीनाथ व्यास, अध्यक्ष भाजपा पेंशनर प्रकोष्ठ
सरकार का यह फैसला पेंशनर्स के हित में किया गया है। इससे एनओसी प्रथा खत्म हो जाएगी। पेंशनर्स को जेब से पैसा खर्च करके दवा नहीं खरीदनी पड़ेगी। गांव के पेंशनरों को गांव के सामुदायिक केन्द्र पर ही दवा मिल जाएगी। भंडार की चाहे तो इस व्यवस्था को अपना सकता है।
-वासुदेव भारद्वाज, अध्यक्ष पेंशनर समाज
फायदा-नुकसान
>> पेंशनर्स की दवाओं के लिए पूर्व में भी निजी दवा व्यवसायी को अधिकृत किया गया था। उसकी मोनोपोली के कारण यह काम वापस भंडार को ही अपने हाथ में लेना पड़ा। ठेका प्रथा से पेंशनर्स के दवा बाजार पर फिर से मोनोपोली की आशंका।
>> सहकारी उपभोक्ता होलसेल भंडार एक व्यवस्थित संस्था है। पेंशनर्स को दवाइयां वितरण में उसका निजी हित काफी कम होता है, जबकि ठेकेदार अपने लाभ के लिए ही बिक्री करेंगे।
>> निजी दुकानों पर वृद्ध पेंशनर्स को बैठने, पेयजल आदि की सुविधाएं नहीं मिलेंगी, जबकि भंडार की पेंशनर्स शॉप पर पेंशनर के बैठ कर आराम करने की सुविधा है।
>> निजी दुकानों को ठेका देने से एनओसी प्रथा समाप्त हो जाएगी। इससे पेंशनर्स को काफी राहत मिलेगी, क्योंकि छह-छह माह से उनके भुगतान अटके पड़े हैं।
>> भंडार की पेंशनर्स शॉप की ऑडिट होती है। दवाओं की बिक्री पर भंडार प्रशासन की नजर रहती है, जबकि नई व्यवस्था में ऑडिट का खुलासा अब तक नहीं हो सका है।
>> डॉक्टर द्वारा लिखी हुई दवाइयां ही पेंशनर्स को मिले, इसकी जांच की कोई व्यवस्था नहीं है। जेनरिक के नाम पर प्रोपेगेंडा दवाइयां देने की शिकायत शुरू से ही रही है।
साढ़े तीन करोड़ से अधिक बकाया
सहकारी उपभोक्ता होलसेल भंडार का बीपीएल तथा पेंशनर्स की दवाइयों पेटे साढ़े तीन करोड़ रुपए से अधिक बकाया है। इस रकम की वसूली होने से पहले ही भंडार से पेंशनर्स को दवा वितरण का काम छिन जाएगा।
बीपीएल को दवा वितरण का काम भंडार के हाथ से पहले ही निकल चुका है। पीबीएम अस्पताल प्रशासन अब अपने स्तर पर ही दवाइयां दे रहा है लेकिन भंडार के एक करोड़ 17 लाख रुपए अब भी अस्पताल प्रशासन में बकाया पड़े हैं। इसके अलावा पेंशनर्स को दवा वितरण के पेटे थोक विक्रेताओं का दो करोड़ 66 लाख 17 हजार रुपए का भुगतान बाकी पड़ा है। चिकित्सा पेंशन योजना के तहत जिला कोष कार्यालय से इस रकम का भुगतान अब तक नहीं हो पाया है।
सहकारिता आंदोलन को झटका
सरकार के इस निर्णय से सहकारिता आंदोलन को बड़ा झटका लगा है। पेंशनर्स की दवाइयों का काम निजी हाथों में जाने से सहकारी उपभोक्ता होलसेल भंडार की आय का एक बड़ा स्रोत्र खत्म हो जाएगा। इस दिनों सहकारी समितियों में चुनाव की प्रक्रिया चल रही है। भंडार के संचालक मंडल का गठन भी किया जा रहा है। आने वाला समय नए संचालक मंडल के लिए चुनौती भरा होगा। नए अध्यक्ष को आय के नए स्रोत्र तलाशने होंगे। वर्ना भंडार का काम खाद्य सामग्री, परचून और वस्त्र बेचने तक ही सीमित होकर रह जाएगा।
11 पेंशनर शॉप बंद होंगी!
राज्य सरकार के इस निर्णय से सहकारी उपभोक्ता होलसेल भंडार को बड़ा झटका लगा है। पेंशनर्स की दवाइयों का काम ठेके पर चले जाने से भंडार की जिलेभर में 11 पेंशनर्स शॉप बंद हो जाएंगी और वहां कार्यरत हेल्पर बेरोजगार हो जाएंगे। इसके अलावा भंडार को हर साल करोड़ों रुपए का नुकसान होगा।
भंडार की पीबीएम अस्पताल में तीन, जिला अस्पताल में दो तथा शेष दुकानें डिस्पेंसरियों के पास है। भंडार की पेंशनर शॉप पर हर माह 30 से 40 लाख रुपए की बिक्री हो रही है। यह भंडार की आय का बड़ा स्रोत्र बना हुआ है, जो अब बंद हो जाएगा। दवाइयों की बिक्री के लिए भंडार के पास केवल कैश काउंटर ही रह जाएंगे।