मुंबई. महानगर मुंबई के विभिन्न आरटीओ दफ्तरों से बीते पांच सालों में लगभग 12 लाख 12 हजार ड्रायविंग लाइसेंस जारी किए गए हैं। साथ ही इसी अंतराल में करीब 11 लाख 12 हजार डुप्लीकेट ड्रायविंग लाइसेंस भी जारी किए गए।
इसका सीधा मतलब है कि महानगर में बीते पांच वर्ष के दौरान रोजाना 609 ड्रायविंग लाइसेंस ‘खो’ गए, क्योंकि ओरिजनल के गुम होने की शिकायत के बाद ही डुप्लीकेट लाइसेंस जारी होता है। मुंबई के चेतन कोठारी ने सूचना का अधिकार कानून के तहत आरटीओ से जानकारी मांगी, जिसमें यह तथ्य उजागर हुए हैं।
अनेक के पास एक से अधिक लायसेंस : मुंबई में अपने ट्रक से तीन लोगों को कुचलने वाले राम यादव नामक ड्रायवर को हाल में बोरीवली से गिरफ्तार किया गया था। जांच में पता चला कि उसके पास एक-दो नहीं, बल्कि आठ ड्रायविंग लाइसेंस थे। ये सभी लायसेंस अंधेरी स्थित एक ही आरटीओ दफ्तर से जारी किए गए थे। आरटीओ के सूत्र ने बताया कि कुछ पैसे खर्च करने पर डुप्लीकेट लायसेंस आसानी से बन जाता है।
शराब विरोधी मुहिम का असर : मुंबई ट्रैफिक पुलिस ने महानगर में जब से शराब पीकर गाड़ी चलाने वालों के खिलाफ मुहिम छेड़ी है, तब से डुप्लीकेट लायसेंस लेने वालों की संख्या में खासा इजाफा हुआ है। शराब पीकर गाड़ी चलाते वक्त पकड़े जाने पर पुलिस लायसेंस जमा कर लेती है, जिसे जुर्माना भरकर कोर्ट से छुड़ाना पड़ता है।
इसकी बजाय लोग लायसेंस खोने की शिकायत दर्ज कराकर डुप्लीकेट लायसेंस जारी करवा लेते हैं। ड्रायविंग स्कूल चलाने वालों की आरटीओ दफ्तरों में अच्छी पहुंच होती है, जिसके चलते सिर्फ नाम, ओरिजनल लायसेंस जारी करने की तारीख और हस्ताक्षर से डुप्लीकेट लायसेंस जारी हो जाता है।