उदयपुर.
पहली जून से 8 जुलाई के सवा महीने में जिले में औसतन मात्र सवा चार इंच (109 मिमी) बरसात ही हुई। राज्य में यह सबसे कम आंकड़ा है। इससे लगता है कि इस साल मेह की मेहरबानी मेवाड़ पर कम है।
राज्य के अन्य जिलों में अब तक औसत बरसात हो चुकी है। उदयपुर में खंड वर्षा हुई। इस कारण सलूंबर व मावली तहसीलों में 200 मिमी से अधिक बारिश हो चुकी है, जबकि वल्लभनगर, सराड़ा व धरियावद में बारिश का आंकड़ा तीन अंकों तक नहीं पहुंच पाया है।
उदयपुर में प्री-मानसून बरसात 12-14 जून के मध्य हुई तो खुशी छा गई। यह खुशी एक महीने से काफूर है। रोज दिन सूखा बीतने से लोग निराश हैं। सहायक निदेशक, कृषि सुधीर कुमार वर्मा के अनुसार अगर महीने भर में पर्याप्त बरसात नहीं होती है तो इस बार फसलों का उत्पादन बुरी तरह प्रभावित होगा।
धरती पुत्र के माथे पर चिंता
प्री-मानसून बारिश बाद ही काश्तकारों ने बुवाई शुरू कर दी। जिले में 70 फीसदी क्षेत्रों में बुवाई पूरी हो चुकी है, लेकिन बरसात का नामोनिशान नहीं है। छह दिनों से बरसात का दौर करीब-करीब थमा हुआ है। खेतों में नन्हीं कोंपलों को पानी की दरकार किसानों के माथें में चिंता की लकीरें बनकर दिखाई दे रही हैं।
खंड वर्षा से उभरी चिंता
मानसून के दौर में इस बार खंड वर्षा किसानों की चिंता का मुख्य कारण है। जहां सर्वाधिक बारिश सलूंबर में 263 मिमी हुई वहीं मावली में 218 मिमी, झाड़ोल 106 मिमी, गिर्वा 118 मिमी, कोटड़ा 104 मिमी व गोगुंदा में 103 मिमी वर्षा अब तक हो चुकी है। दूसरी ओर वल्लभनगर में केवल 45 मिमी, खेरवाड़ा 85 मिमी, सराड़ा 56 मिमी व धरियावद में 92 मिमी वर्षा ही हुई है।
आवै जदी मोकलूं इंदर नै..
उदयपुर. वष्र में विलंब के दौर में पुरुषों द्वारा चूरमा-बाटी और अन्य पूजा के बाद गंगा नहीं खलकी तो महिलाओं ने मोर्चा संभाला और बाजे-गाजे के साथ गणगौरघाट तक पहुंचकर कीचड़, गोबर से भरी मटकियां फोड़ी। पीछोला के खाली पेटे को पूजकर उस पर पड़ी जुर्रियों की गुहार अपने शब्दों में की- पीछोला रो पेटो फाट्यो, हूकी हगÝी मेंढकियां, इंदरजी पाणी वरसाओ, ओर करो थें ंदेर कियां..।
ढोल के ढमके और गीतों के हमचे बड़ा बाजार, मोचीवाड़ा, भड़भूजा घाटी आदि इलाकों की महिलाएं मंगलवार शाम को जुलूस में निकली। गीतों के बोल संवाद वाले थे- इंदरजी ने मोकल ए म्हारी वीजू राणी देस में.., इंदर तो गिया परदेस, आवै जदी मोकलूं ए म्हारी दन्या राणी..।
महिलाओं ने रास्ते में, कुछ दुकानों के बाहर खाली और गोबर से भरी मटकियां फोड़ी। पीछोला के सूखे पेटे में पहुंचकर उसकी धुलाई की, जुर्रियों को पाटने का प्रयास किया, धूप-दीप किया और मेवाड़ को निहाल कर देने की इंद्रदेव से प्रार्थना की।