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मास्साब को मिली ‘सिफर’ की सजा

सीकर. आठवीं बोर्ड का जीरो रिजल्ट देने वाले मास्साब का तबादला कर दिया गया है। जीरो परिणाम देने वाले स्कूलों के करीब 18 प्रधानाध्यापकों पर भी गाज गिरी है। 0 से 19 फीसदी रिजल्ट देने वाले शिक्षकों को हटाकर दूसरे स्कूलों में भेजा गया है। दैनिक भास्कर ने चार जून के अंक में ‘मास्साब ने पढ़ाया सिफर’ शीर्षक से खबर प्रकाशित कर सरकारी स्कूलों की कड़वी हकीकत अभिभावकों के सामने रखी थी। शिक्षा विभाग सूत्रों के मुताबिक, खराब परिणाम देने वाले 33 शिक्षकों का भी तबादला किया गया है।

बड़े मास्साब भी नहीं बचे
0 से 19 फीसदी रिजल्ट देने वाले बड़े मास्साब को भी कार्यरत स्कूल से हटाकर दूसरी जगह लगा दिया गया है। शिक्षा विभाग के मुताबिक, तबादलों के दौरान यूपीएस स्कूलों के प्रधानाध्यापकों का ब्लॉक भी बदला गया है।

जानकारी के अनुसार प्रिंसिपल पोखरमल को सामोता का बास खंडेला से मंडातू छोटी फतेहपुर, सुवालाल को शाहपुरा से गोवर्धनपुरा दांता, सुगनाराम मीणा को सेवदबड़ी धोद से बासनी लक्ष्मणगढ़, हरलालसिंह को अलखपुरा गोदारान से रीणासू फतेहपुर, कालूराम को कल्याणपुरा लक्ष्मणगढ़ से बागास फतेहपुर, बीरबलसिंह को खीरवा से उदनसकी फतेहपुर, सावरमल को लालासी लक्ष्मणढ़ से रोरू छोटी फतेहपुर, रूड़मल सैन को बुद्धसिंह की ढाणी नीमकाथाना से साडानाखूं दांता, बीरबलराम को अहिरान पाटन से बड़गुर्जरी पचार, घासीराम यादव को बहादुरसिंह से चिड़ासरा दांता, आशाराम को दाललसर फतेहपुर से कंटेवा लक्ष्मणगढ़, मनोहर मीणा को गोरास फतेहपुर से मलसीवास लक्ष्मणगढ़, सोहनसिंह मीणा को बाजौर से रामनगर लक्ष्मणगढ़, केशरदेव सैनी को खोरी ब्राrाणवास पिपराली से ढाणी भाकरों की लक्ष्मणगढ़, शिवनारायण रैगर को मालियों की ढाणी श्रीमाधोपुर से रूल्याणा पट्टी लक्ष्मणगढ़, रामकरण जांगिड़ को सलेदीपुरा खंडेला से खींचड़ों की ढाणी लक्ष्मणगढ़, विनोदकुमार यूपीएस 2 को लक्ष्मणगढ़ से हरसावा छोटा फतेहपुर तथा लक्ष्मण शर्मा चिपलाटा से दादिया नीमकाथाना लगाया गया है।

हुए ‘फेल’, फिर भी कमान
प्रशासनिक स्तर पर बड़े मास्साब फेल हो गए, बावजूद इसके उन्हें फिर से नए स्कूलों की कमान सौंप दी गई। यह बात अलग है कि कुछ प्रधानाध्यापकों ने अपने विषय में अच्छा रिजल्ट दिया, लेकिन बड़े मास्साब छोटे गुरुजी पर कंट्रोल नहीं रख सके और रिजल्ट सामने आया ‘सिफर’।

फिर भी इन्हें हैडमास्टर की कमान ही सौंपी गई है। जानकारों का मानना है कि इन्हें कमान देने की बजाए माध्यमिक शिक्षा में विषय अध्यापक के पद पर लगाया जाना चाहिए था, ताकि यह अपने विषय पर बेहतर काम कर सकें। अब सवाल यह भी है कि क्या यही बड़े मास्साब नए शिक्षा सत्र में 100 प्रतिशत रिजल्ट दे पाएंगे या नहीं?





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