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दर्द के दरिया में जहर की बूंद

सीकर.hiv क्या हम कम परेशान हैं? कब-कब और कहां-कहां जिल्लत सहते रहेंगे? आखिर हमारा कसूर क्या है? ये दर्द उन एचआईवी पाजिटिव महिलाआं का है जो अपनी ‘सरकारी पहचान’ के कारण र्दुव्‍यव्यवहार का शिकार हो रही हैं।

बस, रेल में होने वाला ‘र्दुव्‍यव्हार’ अब इनकी बर्दाश्त सीमा से बाहर हो चला है। इनके लिए चंद कदम का सफर तय करना मुश्किल हो गया है। काबिलेगौर है कि जानलेवा बीमारी एचआईवी पाजिटिव पीड़ितों के लिए बस, रेल के किराए में 75 फीसदी छूट के लिए पास दिया जाता है। पास पर एचआईवी पाजिटिव लिखा जाता है।

ये सुविधा मिलने के साथ ही इनके साथ र्दुव्‍यवहार का सफर भी शुरू हो जाता है। बस के परिचालक पास दिखाने पर इन पीड़िताओं से ऐसे-ऐसे सवाल करते हैं कि जवाब तो दूर वहां खड़े रहना भी संभव नहीं होता है। करीब डेढ़ महीने पहले झुंझुनूं से जयपुर दवाई लेने जा रही एक पीड़िता के साथ रोडवेज बस का परिचालक तो यात्रियों के सामने ही र्दुव्‍यव्हार करने से नहीं चूका।

दूसरी महिलाओं के साथ भी ऐसा अक्सर होता रहा है। परेशान पीड़िताओं ने इस दर्दभरी दास्तां का खुलासा जयपुर में एचआईवी पाजिटिव पीड़ितों के सहयोग के लिए मुहिम चला रहे आरएनपी प्लस एनजीओ के सामने किया। एनजीओ के मुताबिक इस तरह के सबसे अधिक मामले झुंझुनूं, सीकर, पाली व जोधपुर में हो रहे हैं।

बकौल आरनएबी की सचिव लीलामणी पांच महीने पहले इसका खुलासा हुआ था। हमने रोडवेज के खिलाफ हाईकोर्ट में वाद दायर किया। इस बार एनजीओ ने पास पर एचआईवी पाजिटिव नहीं लिखने व कोई कोड अंकित करवाने के लिए उच्च न्यायालय में गुहार लगाई है।

एनजीओ का मकसद
एनजीओ के बृजेश दुबे बताते हैं कि हमारे संगठन से राज्यभर से करीब आठ हजार एचआईवी पाजिटिव लोग जुड़े हैं। इसमें 300 महिलाएं शामिल हैं। संगठन इन लोगों को समाज में सम्मान दिलाने के प्रयास के अलावा दवाईयां और अन्य सुविधाएं दिलाने के लिए काम कर रहा है। रोडवेज व रेलवे पास की व्यवस्था भी एनजीओ की ओर कराई जाती है।

क्यों लिखा जाता है एचआईवी पाजिटिव?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर बस पास में एचआईवी पाजिटिव व उसका नाम लिखा क्यों जाता है। डा. बीएल रणवां कहते हैं कि एचआईवी पाजिटिव होने के और भी कई कारण हैं। इसमें हर व्यक्ति को जागरूक होना जरूरी है। फिर भी यह सही है कि पास में एचआईवी पाजिटिव नहीं लिखा जाए।

हमें इस बात पर आपत्ति है कि आखिर बस, रेल के पास में एचवाईवी पाजिटिव क्यों लिखा जाता है? पहले भी अदालत में गए हैं और अब फिर जाने की तैयारी कर ली है। झुंझुनूं, सीकर, जोधपुर व पाली जिलों की कुछ महिलाओं के साथ बस कंडक्टरों ने र्दुव्‍यव्यवहार किया है।
- लीलामणी, सचिव आरएनपी प्लस एनजीओ जयपुर

पास पर एचआईवी पाजीटिव लिखा जाता है। इसमें जरूरी है कि पीड़िता डॉक्टर के दिए इस सर्टिफिकेट को अलग से परिचालक को दिखा दे। यदि कोई परिचालक बदतमीजी करता है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाती है।
- दुष्यंत यादव, चीफ जनरल मैनेजर, सीकर

महिला व पुरुष दोनों को रोडवेज में यात्रा के दौरान खासी दिक्कत होती है, मगर इसमें सबसे ज्यादा परेशानी महिला एचआईवी पाजिटिव को है। पिछले तीन महीने के दौरान सीकर, झुंझुनूं के कई एचआईवी पाजिटिव इस परेशानी से गुजर चुके हैं।
- एक एचआईवी पाजिटिव





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