कोटा. बूंदी जिले के डाबी क्षेत्र के एक युवक की न्यायिक अभिरक्षा के दौरान मंगलवार को कोटा के एमबीएस अस्पताल के कैदी वार्ड में मौत हो गई। मामले की न्यायिक जांच के आदेश दिए गए हैं।
पुलिस ने डाबी निवासी 30 वर्षीय विजय सिंह पुत्र डालू बंजारा, रूपा बंजारा व जीवा बंजारा को एक जुलाई को गिरफ्तार किया था। उन पर छीतर बंजारा से मारपीट करने का आरोप था।
तीनों को 2 जुलाई को बूंदी न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक अभिरक्षा में बूंदी जेल भेजा गया। जेल में विजयसिंह की तबीयत बिगड़ गई और पेट में दर्द होने लगा। उसे जेल के अस्पताल में भर्ती कराया गया।
हालत न सुधरने पर 7 जुलाई की शाम को कोटा के महाराव भीमसिंह चिकित्सालय के कैदी वार्ड में रैफर कर दिया गया, जहां मंगलवार को उसने दम तोड़ दिया। कोटा जेल प्रशासन ने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट को घटनाक्रम से अवगत कराया। इस पर उन्होंने एसीजेएम कैलाश गुप्ता को न्यायिक जांच के आदेश दिए। उनकी उपस्थिति में मेडिकल बोर्ड से पोस्टमार्टम कराकर शव परिजनों को सौंप दिया।
मामले की न्यायिक जांच शुरू हो गई है। रिपोर्ट आने के बाद अपेक्षित कार्रवाई की जाएगी। इंद्रगढ़ में हुई मौत के मामले में मुकदमा दर्ज हो गया था। तालेड़ा की घटना के बाद न्यायिक जांच चल रही है।
—ओमप्रकाश, एसपी, बूंदी
हाल ही में चार्ज लिया है, इसलिए जानकारी नहीं है। विजयसिंह पर प्राणघातक हमले का मुकदमा था। अवैध हिरासत का आरोप सही नहीं है। न्यायिक जांच चल रही है।
—अनिल विश्नोई, एसएचओ, डाबी
यूं चला घटनाक्रम
विजयसिंह के भाई कालू बंजारा का आरोप है कि डाबी पुलिस ने शुरू से ही उनके साथ ज्यादती की है। घटनाक्रम 30 जून से शुरू हुआ था। उस दिन गांव के ही छीतर बंजारा व उसके पुत्रों ने विजयसिंह की भतीजी के साथ छेड़छाड़ की थी। इस पर विजय, कालू, नंदकिशोर, जीवा व रूपा समझाने के लिए छीतर के घर गए थे। वहां उन्होंने उन पर पथराव कर दिया।
इसकी रिपोर्ट उन्होंने उसी समय डाबी थाने पहुंचकर दर्ज कराने का प्रयास किया किंतु, पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज नहीं की। उसी दौरान छीतर भी वहां पहुंच गया और उसके कहने पर पुलिस ने विजय, रूपा व जीवा को गिरफ्तार कर लिया। थाने में एसआई हंसराज, कांस्टेबल प्रकाश व छीतर ने विजय के पेट में डंडों से कई वार किए। वहां से परिजन सीधे बूंदी पहुंचे और एसपी ओमप्रकाश से शिकायत की। एसपी के आदेश के दो दिन बाद तीनों की गिरफ्तारी दर्ज की और उन्हें अदालत में पेश किया।
पानी तक नहीं पी सका
परिजनों का कहना है कि पेट में अंदरुनी चोट से विजयसिंह तीन दिन तक खाना नहीं खा पाया। पानी पीते ही उसे उल्टी हो जाती थी। परिजन इलाज की मांग करते रहे, लेकिन बूंदी जेल से उसे कोटा रैफर नहीं किया गया। जब वह मरणासन्न हो गया,तब उसे भेजा गया।