अजमेर. नगर परिषद के स्वास्थ्य निरीक्षक व अफसर को काम में लापरवाही महंगी पड़ गई है। अदालत के आदेश के बाद कमिश्नर ने निरीक्षक को जहां चार्जशीट थमा दी है, वहीं हैल्थ अफसर के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए सरकार को सिफारिश की है।
परिषद के इन कारिन्दों की कोताही का नमूना यह है कि इन्होंने व्यक्ति की मृत्यु के आठ साल बाद न केवल चालान किया, बल्कि दंड की कार्रवाई भी कर दी।
नवंबर, 07 में तत्कालीन न्यायिक मजिस्ट्रेट संख्या दो हिमांकनी गौड़ ने परिषद प्रशासन को इनके खिलाफ कार्रवाई के आदेश दिए थे। अदालत के आदेश की पालना में परिषद आयुक्त (विकास) जगदीश चौधरी ने निरीक्षक रूपाराम चौधरी के खिलाफ 17 सीसी में चार्जशीट जारी कर दी है, जबकि हैल्थ अफसर डॉ. योगेन्द्र लोहानी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए सरकार को सिफारिश की है।
मामला, एक नजर..
परिषद के स्वास्थ्य निरीक्षक रूपाराम चौधरी ने नमकीन व्यवसायी किशन मंत्री के खिलाफ 28 नवम्बर, 07 को राजस्थान नगर पालिका अधिनियम की धारा-203 (2) के तहत कार्रवाई की थी। निरीक्षक की रिपोर्ट के आधार पर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. लोहानी ने न्यायिक मजिस्ट्रेट संख्या दो की अदालत में चालान पेश किया था।
चालान के मामले में नोटिस जब व्यवसायी के प्रतिष्ठान पर पहुंचा, तो किशन मंत्री के पुत्र महेश ने अदालत में मृत्यु प्रमाण-पत्र पेश किया, जो परिषद द्वारा 31 दिसंबर, 99 को जारी किया गया था, जिसमें किशन मंत्री की मृत्यु 27 दिसंबर, 99 को होना अंकित था, जबकि निरीक्षक द्वारा मृत्यु के आठ साल बाद मंत्री के खिलाफ चालान कर दंड की कार्रवाई संस्थित की गई थी।
अदालत का आदेश
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि किशन मंत्री के विरुद्ध जो कार्रवाई संस्थित की गई है, वह प्रथम दृष्टया ही बिना किसी न्यायसंगत या विधिपूर्ण आधार के नितांत असत्य, झूठी व मनगढ़ंत प्रतीत होती है। डॉ. लोहनी द्वारा चालान किए जाने की स्वीकृति मृतक किशन मंत्री के विरुद्ध की गई है, जबकि डॉ. लोहनी ने ही मृतक किशन का मृत्यु प्रमाण-पत्र जारी किया था।
अदालत ने नवंबर में कार्रवाई के आदेश दिए थे। कमिश्नर द्वारा उनकी पालना में निरीक्षक को चार्जशीट दे दी गई है, जबकि स्वास्थ्य अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की गई है।
-एचएस जाखड़, विधि अधिकारी