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International International टोयाको(जापान) संकटों से घिरे भारत-अमेरिकी परमाणु करार पर बुधवार को एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल हुई। इसके तहत जी-8 ने भारत की बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए असैन्य परमाणु करार पर बुधवार को अत्यधिक मजबूत रुख अपनाने का निर्णय किया है।
जी-8 सम्मेलन के आखिर में जारी अध्यक्ष के संक्षिप्त बयान में इस आशय के विचार जताए गए हैं। यह बयान बुश व मनमोहन की जी-8 सम्मेलन में अलग से हुई मुलाकात के कुछ घंटों बाद आया है।
ऑस्ट्रेलिया नहीं करेगा विरोध! मेलबोर्न :ऑस्ट्रेलिया द्वारा भारत-अमेरिकी करार का परमाणु आपूर्तिकर्ता देशों के समूह (एनएसजी) में विरोध नहीं किए जाने की उम्मीद है। आस्ट्रेलिया में विपक्षी दल केविन रूड सरकार पर भारत को यूरेनियम नहीं बेचने के रुख को पलटने के लिए दबाव डाल रहे हैं।
रूड की लेबर सरकार भारत को यूरेनियम बेचने के खिलाफ है, क्योंकि उसने परमाणु अप्रसार संधि पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं। फिर भी सूत्रों ने ‘द एज’ को बताया कि आस्ट्रेलिया द्वारा 45 देशों के समूह एनएसजी में करार का विरोध करने की उम्मीद नहीं है। यह रिपोर्ट ऐसे समय पर आई है, जब प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह रूड से टोयाको में जी-8 सम्मेलन से इतर पहली बार मिले हैं।