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सुधार की हमेशा गुंजाइश रहती है

लीडरशिप मंत्र.बात ग्यारहवीं कक्षा की है। परीक्षा के दौरान प्रश्नपत्र को आखिर से हल करने की शुरुआत करने की मेरी आदत थी अर्थात मैं पहले दस नंबर वाले विस्तृत प्रश्नों का जवाब लिखता था और बाद में एक-एक नंबर वाले संक्षिप्त प्रश्नों पर आता था। मेरे एक शिक्षक ने मुझसे संक्षिप्त प्रश्नों को पहले हल करने का सुझाव दिया। लेकिन मेरी सोच थी कि मुझे चूंकि अधिकतम अंक हासिल करने हैं अत: पहले विस्तृत प्रश्नों के उत्तर देने चाहिए। अगर मैं उन्हें बाद में हल करूंगा तो बेवजह के दबाव में आ जाऊंगा। वास्तव में मेरी लिखावट बहुत खराब थी और इसका प्रभाव मेरे अंकों पर पड़ता था। मेरे शिक्षक चाहते थे कि मैं संक्षिप्त प्रश्नों को पहले हल कर अधिक से अधिक अंक सुनिश्चित करूं। लेकिन मैंने उनकी सलाह पर कभी भी कान नहीं दिए और बोर्ड परीक्षाओं में मुझे इसका खामियाजा भुगतना पड़ा।

आज जब लीडरशिप की बात चलती है तो पहली बात जो जेहन में आती है वह है बदलाव, बदलाव और सतत बदलाव। पुराने को नष्ट कर नई की रचना करना। हममें से अधिकांश अपनी आदतों में बदलाव लाना बहुत मुश्किल मानते हैं, भले ही वह हमारी भलाई के लिए ही क्यों न हो। हम मान कर चलते हैं कि हम वर्तमान में जो कर रहे हैं, वहीं हमारे लिए ठीक है। इस तरह हम आंखों पर पट्टा चढ़ाए घोड़े की तरह बस नाक की सीध में दौड़ते रहते हैं। हमेशा याद रखिए आप जब कुछ नया शुरू करते हैं तो सिर्फ आपको ही मालूम होता है कि वह आपके लिए अच्छा है या बुरा। बहुत जरूरी है कि बेहतर कल के लिए आप अपने अहं का परित्याग कर पुरानी आदतों को छोड़ दें। याद रखें सुधार की हमेशा गुंजाइश रहती है।

-लेखक नेतृत्व प्रशिक्षण संस्था लीडकैप के संस्थापक हैं।





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