जालंधर.सक्सैस पाने की चाहत इन दिनों महिलाएं से दोगुना काम करवा रही है। ऑफिस के साथ-साथ घर को मैनेज करना, सुबह से लेकर रात तक भागदौड़ और इस बीच खुद के बारे में उन्हें सोचने की फुर्सत तक नहीं मिलती। टैंशन से भरी इस जिंदगी में महिलाएं खुद के लिए कुछ ऐसे पल भी नहीं निकाल पाती, जिसमें वे सुस्ता सकें।
काम के दबाव में वह कई बार इतनी व्यस्त हो जाती हैं कि उन्हें थकान महसूस नहीं होती। घर के काम के साथ-साथ बाहर की दुनिया की जिम्मेदारी निभाने के लिए उनमें जो एनर्जी है, वह काम के दबाव के कारण है न कि फ्रैशनैस के कारण। हालात यह हैं कि इन सब जिम्मेदारियों के बोझ उनकी नींद को पूरा नहीं होने देते। मनोचिकित्सक मानते हैं कि रात को ठीक से नींद न आने की शिकायत तो कई लोगों की है, लेकिन इसका कारण जानते हुए भी वह अंजान बन जाते हैं।
कुछ न कुछ भूल ही जाती हूं
प्रोफैशनल राशि बताती हैं कि सुबह की प्लानिंग रात से ही दिमाग में चलने लगती है। कई बार ऑफिस जाकर कुछ याद आता है, तो कई बार ऑफिस का कुछ महत्वपूर्ण काम घर पहुंचकर। टैंशन की वजह से रात को अच्छे से नींद नहीं आ पाती। अभी दो साल के करियर में ही भूलने की आदत हो गई है। राशि की तरह ही कई प्रोफैशनल वुमन छोटी-छोटी बातें भूल जाती हैं और डॉक्टर्स की माने तो प्रोफैशनल लोगों में मैमोरी लॉस की प्रॉब्लम भी ज्यादा रहती है। अच्छी और गहरी नींद की कमी के कारण तनाव, हाई ब्लड प्रैशर, मैमोरी फाल और डायबिटीज जैसी बीमारियां भी वुमन को अपनी चपेट में ले रही हैं।
बढ़ने लगे हैं केसेज
कार्डियक सर्जन अश्विनी सूरी ने बताया कि शरीर को कम आराम मिलने के साथ- साथ बुरी खाने-पीने की आदतें, एक्सरसाइज न करना कई बीमारियों को उम्र से पहले ही न्योता दे रही हैं। 50 की उम्र के आसपास आने वाले अटैक अब 30 की उम्र में ही महिलाएं को अपना शिकार बना रहे हैं। काम मानसिक स्थिति के साथ-साथ शारीरिक स्थिति को भी कमजोर कर रहा है। महिलाएं को चाहिए कि वह फास्ट वॉक करें, वेट ट्रेनिंग लें और खुद के लाइफस्टाइल पर भी ध्यान दें।
प्रोफैशनल अप्रौच के साथ चलें
कार्डियक सर्जन बलराज गुप्ता का कहना है कि वुमन घर और ऑफिस में आदमी के मुकाबले ज्यादा काम करती हैं। उन पर ज्यादा रिस्पांसिबिलिटी रहती है और आशाएं भी। स्ट्रैस मैनेजमैंट से जूझने के लिए न तो प्रॉपर ट्रेनिंग सैंटर है और न ही एक्सरसाइज। इसीलिए महिलाएं को खुद के लिए समय निकालना चाहिए, अच्छी नींद के साथ-साथ अपनी हॉबीज को न भूलें। डिप्रैशन, एंग्जाइटी जैसी बीमारियों से बचने के लिए महिलाएं को खुद ही अलर्ट होने की जरूरत है।
हैडेक और कमर दर्द के केसेज में इजाफा
फिजियोथैरेपिस्ट डॉ. रुही सोंधी ने बताया कि वर्क प्रैशर में रहने के कारण शरीर धीरे-धीरे बीमारियों से घिरने लगता है। यह भी जरूरी नहीं कि फील्ड वर्क करने वालों को ही यह परेशानी हो, सीटिंग जॉब वालों को भी इन परेशानियों का सामना करना पड़ता है। सीटिंग जॉब वाली महिलाओं को भी गर्दन और कमर दर्द की शिकायत करती है। इसी के साथ टैंशन, हैडेक जैसी परेशानी भी महिलाएं में बढ़ रही हैं।
टीवी को कहें बाय-बाय
डॉक्टर्स के मुताबिक बैडरूम में टीवी नहीं रखना चाहिए। कई बार नींद इस कारण भी डिस्टर्ब होती है। टीवी देखते-देखते ज्यादातर लोग नींद से कंप्रोमाइज कर लेते हैं, जिस कारण रात भर वह सो नहीं पाते। इसके साथ ही खुद को हर तरह से बेहतर साबित करने की चाहत भी महिलाएं को अच्छी नींद लेने से रोकती है।
इन बातों का रखें ध्यान
>> एक्सरसाइज करें >> फास्ट वॉक करें >> हर दो घंटे में कम से कम दस मिनट आराम करें >> टीवी देखने की बजाय लाइट म्यूजिक सुनें >> रात को 7 से आठ घंटे तक की नींद लें >> योगा और मैडिटेशन के जरिए रिलैक्स हों।