आपस की बात राहुल गांधी ने अपने दिल की बात जाहिर करते हुए कहा कि वे खुली मानसिकता वाली अर्थात खुले दिमाग वाली युवती से शादी करना पसंद करेंगे। उनकी नजरों में उनके लिए जीवनसाथी के रूप में वह लड़की आदर्श रहेगी जो दूसरों के नजरिये से दुनिया को समझने की कोशिश करें।
सारी पारिवारिक समस्याओं का हल और परस्पर सामंजस्य का आधार ही खुले दिमाग की मानसिकता है। अधिकांश पारिवारिक विवादों और संघर्षो में संकीर्ण नजरिया ही एक-दूसरे से टकराव का मुख्य कारण होता है। परिवार के सदस्य हों या यहां तक कि पति-पत्नी के रिश्ते में भी एक-दूसरे के प्रति छोटी सोच ही परस्पर टकराव पैदा करती है।
संकीर्ण और छोटी मानसिकता के कारण ही संदेह के बीज भी उत्पन्न होते हैं। हर क्रिया, व्यवहार का विपरीत अर्थ लगाया जाता है, उसके छिपे निहितार्थ ढूंढ़े जाते हैं, उनकी अपने ही नजरिये से व्याख्या की जाती है। जब इतनी सारी बातें सोच में शामिल हो जाएं तब एक-दूसरे को समझने का मौका ही कहां बचता है? सोच की संकीर्णता तो उस हद तक बढ़ जाती है कि एक-दूसरे के व्यवहार को लेकर मन में कुंठाएं पाल ली जाती है। जब कभी इन्हें भाषा द्वारा निकालने का मौका मिलता है तो ऐसे विष बाणों की वष्र होती है कि उनका घाव शायद शारीरिक घाव से भी अधिक पीड़ा देता होगा। एक-दूसरे पर संदेह, व्यवहार की व्याख्या का आधार भी होता है कि प्राय: अपने दिमाग के दरवाजे और खिड़कियां बंद कर लिए जाते हैं।
दूसरी बड़ी बात दूसरों के नजरिये से ही दूसरों को समझने की कोशिश है। शायद यह कहना बहुत आसान है कि दूसरों के दृष्टिकोण और नजरिये से बातों को समझ या परखा जाए। मनुष्य की बुद्धि और ज्ञान उसकी सर्वोत्तम पूंजी है। हर व्यक्ति अपने इस ईश्वरीय वरदान को सर्वश्रेष्ठ समझता है। वह ऐसा सोच ही नहीं पाता कि उसकी बुद्धि और इसी बुद्धि से उपजे विचारों में कोई कमी भी हो सकती है।
बहू सास के दृष्टिकोण को नहीं समझ पाती। उसे लगता है कि वह शायद अपने अधिकार जताने और आधिपत्य का रूतबा बनाए रखने के लिए हस्तक्षेप करती रहती हैं, सास उस बहू के दृष्टिकोण को नहीं समझ पाती कि बहू अब इस घर में अपनी कुछ इच्छा, कामना और प्रयोग चाहती है। पति-पत्नी परस्पर यह नहीं समझ पातें कि वर्षो अलग-अलग माहौल में पले-बढ़े दो वयस्क युवाओं का सोच और समझ को नजदीक आने में समय तो लगेगा। कुछ ही दिनों में यह बदलाव आ जाना संभव नहीं है। यदि एक-दूसरे के प्रति यह नजरिया बना लिया जाए तो आधे से अधिक तलाक के केस वापस हो जाएं।
पति-पत्नी और परिवारों के परस्पर सामंजस्य का एक ही आधार हो सकता है और वह यही कि खुले दिमाग का सोच और दूसरों के नजरिये का भी सम्मान करना या दूसरों के दृष्टिकोण से स्थितियों को समझने की कोशिश करना। जीवनसाथी की सुंदरता, आकर्षण, आत्मनिर्भरता और आर्थिक सुदृढ़ता से भी बढ़कर सर्वश्रेष्ठ गुण और उसकी योग्यता केवल खुला दिमाग है। राहुल गांधी ने टूटते-बिखरते परिवारों, पति-पत्नी के बीच उठते विवादों का एक बहुत ही समझदारी भरा मूल मंत्र दिया है। खुला दिमाग और दूसरों के नजरिये से चीजों को समझने की कोशिश। हम सब यह शुभकामनाएं देते हैं कि उन्हें उनके सोच के मुताबिक ही जीवनसाथी मिलें।