News
International International वियना. अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) ने भारत के परमाणु करार संबंधी मसौदे को अपने 35 देशों के निदेशक मंडल के पास मंजूरी के लिए भेज दिया है।
भारत सरकार ने इस कदम को अपनी मंजूरी देते हुए आईएईए के पास भेज दिया है। इससे पूर्व विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी ने कहा था कि विश्वास मत के बाद ही आईएईए के पास इस बारे में पहल की जाएगी।
आईएईए की प्रवक्ता मेलिसा फ्लेमिंग ने कहा कि भारत सरकार की पहल पर आईएईए सचिवालय ने अपने सदस्यों के बीच इस मसौदे को वितरित कर दिया है। उनके अनुसार बोर्ड के चेयरमैन अपने सदस्यों से विचार-विमर्श के बाद समझौते को अंतिम रूप देने के लिए बोर्ड मीटिंग की तिथि करेंगे।
आईएईए के अनुसार वियना में 28 जुलाई को स्पेशल गवर्नर मीटिंग होने की संभावना है। इसके पहले जी-8 देशों के सम्मेलन के मौके पर जापान में एक होटल में बुश मनमोहन की मुलाकात हुई।
बुश ने मनमोहन को करार मामले में घरेलू मोर्चे पर विजयी होने की बधाई दी। बुश से मिलने के बाद प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह तनावमुक्त और विश्वास से भरे दिखे। वामपंथियों की समर्थन वापसी के बावजूद वे दुगने उत्साह से लबरेज थे। मुलाकात के बाद दोनों नेताओं ने एक-दूसरे की प्रशंसा की।
आईएईए में जाने का असर?
संदेह क्या?
>> क्या हमारे परमाणु संयंत्रों की जांच का विदेशी एजेंसियों को हक मिल जाएगा?
>> क्या देश के सार्वभौमिक ढांचे में विदेशी हस्तक्षेप की आशंका बढ़ जाएगी?
>> क्या नाभिकीय क्षेत्र में भारत के अनुसंधानों पर विपरीत असर पड़ेगा?
>> क्या मसौदे के खुलासे से परमाणु संयंत्रों पर हमले का खतरा बढ़ जाएगा?
समाधान क्या?
>> इस करार का न तो भारत में होने वाले नाभिकीय अनुसंधानों पर असर पड़ने वाला है और न ही रणनीतिक पहलुओं पर।
>> विदेशी सहयोग को बल मिलेगा।देश का परमाणु कार्यक्रम जारी रह सकेगा।
>> हमारे पावर प्लांट करे ईधन के रूप में यूरेनियम की आपूर्ति हो सकेगी। बुधवार को ही पूर्व राष्ट्रपति कलाम ने जोधपुर में यूरेनियम की जरूरत बताई।
पावर प्लांट करे ईधन के रूप में यूरेनियम की जरूरत पर जोर दिया।
-अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल व गैस के आसमान छूते भाव, कोयले और बड़े बांधों की वजह से होने वाले जलवायु परिवर्तनों को देखते हुए भारत के लिए ऊर्जा के सभी स्रोतों को खोलना जरूरी। देश में बिजली का सालाना उत्पादन 1,32,110 मेगावाट है, जिसमें परमाणु ऊर्जा की हिस्सेदारी महज 3.1 फीसदी है।