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10 साल में 10 गुणा दाम

जालंधर. मिट्टी के तेल (कैरोसिन ऑयल) के खेल में सरकारी सिस्टम फेल साबित हो रहा है। राशन डिपुओं को सप्लाई होने वाला कैरोसिन किराना स्टोरों पर अवैध रुप से बेचा जा रहा है।

डिपू से 9 रु. प्रति लीटर मिलने वाला कैरोसीन करियाना की दुकान पर 25-30 रु. में बिक रहा है। 10 साल पहले यही तेल डिपू से 3 रु. प्रति लीटर बिकता था व दुकानों में 8 से 9 रु. तक मिल जाता था। यह तेल का खेल फूड एंड सप्लाई विभाग की नाक तले चल रहा है, जिसमें ऊपर से नीचे तक के अधिकारी इसमें शामिल हैं।

यूं होता ऊपर से नीचे तक खेल
डिपू होल्डर को विभाग की तरफ से कैरोसीन राशन कार्ड के मुताबिक कोटा मिलता है। एक होल्डर के पास करीब 350 कार्ड होते हैं। ऐसे में उन्हें 7-8 ड्रम तेल अलाट होता है। एक ड्रम में 200 लीटर तेल होता है और एक कार्ड पर सिर्फ 8 लीटर तेल ही दिया जाता है।

तेल का कोटा बढ़ाने के लिए होल्डर इलाका इंस्पैक्टर को रिश्वत देता है और इंस्पैक्शन के बाद होल्डर को कोटा मिल जाता है। बढ़ाए गए कोटे के हिस्से का कैरोसीन डिपू मालिक आसानी से ब्लैक कर देता है। जिले में 1244 डिपू होल्डर हैं और करीब चार लाख कार्ड होल्डर इन डिपूओं से जुड़े हुए हैं। एक अनुमानत मुताबिक एक डिपू होल्डर प्रति माह 3-4 हजार का कैरोसीन ब्लैक कर देता हैं।

ब्लैक ने बढ़ाई कीमत
तेल की कीमत में 30 गुणा बढ़ोतरी ब्लैक होने के कारण हुई है। डिपू होल्डर को 9 रुपए प्रति लीटर तेल मिलता हो, जिसे वह 20 रुपए तक ब्लैक कर रहा है और आगे किराना स्टोर वाले वही तेल 30 रुपए तकबेच देता है।

ब्लैक में मजदूर ही खरीदते हैं तेल
अधिकतर कार्ड होल्डरों के घर गैस सिलैंडर के कनैक्शन होने के कारण वे लोग अपने हिस्सा के तेल डिपो से नहीं लेते हैं। जिससे ये तेल ब्लैक हो जाता है। तेल का अधिकतर इस्तेमाल मजदूर ही करते हैं। शहर के कई ऐसे स्लम इलाके यहां मजदूरों की संख्या अधिक है वहां पर तेल की ब्लैक सबसे ज्यादा होती है। इन इलाकों में किराना स्टोरों पर तेल आसानी से मिल जाता है।

किरयाना स्टोरों पर बिकता है तेल
एक डिपू होल्डर ने नाम न छपवाने की शर्त पर बताया कि तेल बेचे बिना डिपू चलाना बहुत मुश्किल है। विभाग के नियम मुताबिक डिपू चलाया जाए तो वे घाटे में रहते है।

ऐसे में ब्लैक तेल बेचकर ही कुछ मुनाफा हो जाता है। तेल 17 से 20 रुपए में बेच देते हैं। वह लोग 30 फीसदी तेल ग्राहकों को बांटते हैं और बाकी 70 फीसदी को ब्लैक कर देते हैं।

आटो रिक्शा चालक करते इस्तेमाल
ऑटो रिक्शा चालक भी पेट्रोल के साथ कैरोसीन मिक्स कर आटो रिक्शा चलाते है। क्योंकि पैट्रोल उन्हें महंगा पड़ता है। ऐसा करने से ऑटो रिक्शा प्रदूषण भी फैला रहे हैं। गांवों में किसान खेती करने के लिए इस्तेमाल होने वाले साधनों में कैरोसीन का इस्तेमाल करते हैं। वे ब्लैक में तेल लेकर ट्रैक्टर और पंपिंग सैट में भी तेल को मिक्स करते हैं।

हमारे पास किरयाना स्टोर पर तेल 30 रुपए तक बिकने
की कोई शिकायत नहीं आई है और न ही कोई डिपू होल्डर की ब्लैक की शिकायत है। फिर भी हम लोग चैक करेंगे और आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
-गुल बहार सिंह, जिला फूड एंड सप्लाई कंट्रोल, जालंधर





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