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तो आखिर कौन थी वह?

होशियारपुर. जीवित परमजीत कौर हत्याकांड में पंजाब के गृह सचिव से लेकर झूठे गवाहों बारे पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट द्वारा दिए गए फैसले को लेकर आज पुलिस महकमे में हड़कंप मचा रहा।

हर किसी की जुबां पर सिर्फ यही सवाल है कि यदि परमजीत कौर जीवित थी तो पुलिस ने जिस मृत महिला के पिंजर की बरामदगी दिखाई वह असल में कौन थी। फिलहाल पुलिस ने इस मामले में चुप्पी साध ली है।

सवालिया घेरे में पुलिस
हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद होशियारपुर पुलिस की कार्रवाई को लोग शक की निगाह से देख रहे हैं। पुलिस द्वारा झूठी गवाही के दम पर जिस तरह आरोपी बनाए गए गुरदयाल सिंह पुत्र जागीरी राम निवासी मुंडिया रगड़ां और बलदेव राज निवासी साहरी को छह महीने तक बिना कसूर जेल की काल कोठरी में रखा गया, उसे भी अब लोग संदेह की नजर से देख रहे हैं। हाईकोर्ट की इस कार्रवाई के बाद पुलिस इस संबंध में कुछ भी बताने को तैयार नहीं है।

बलदेव-गुरदयाल ने जताया संतोष
झूठा केस बनाकर अवैध तौर पर हिरासत में रखे गए बलदेव राज और गुरदयाल ने हाईकोर्ट के फैसले पर संतोष जताते हुए खुशी जताई है। उनका कहना है कि वे पुलिस के सामने बार-बार गिड़गिड़ाते रहे कि उन्होंने परमजीत कौर की हत्या नहीं की है, लेकिन पुलिस अधिकारियों ने उनकी एक नहीं सुनी। जीवित परमजीत कौर का कहना है कि उसने सबसे पहले सारी बात पुलिस को भी बताई थी।

लेकिन उसे बार-बार मुंह बंद रखने की चेतावनी दी जाती रही। उसने बताया कि 2000 में उसके प्रेम संबंध एक बिहारी श्रमिक प्रेम राजू लाल के साथ हो गए थे, जिसके बाद २क्क्क् में वह उसके साथ बिहार चली गई। बाद में दोनों जालंधर आकर मेहनत मजदूरी करने लगे। इस दौरान उसने तीन लड़कियों को भी जन्म दिया। इसी बीच, जब एक पिंजर मिलने के बाद उसकी हत्या के आरोप में उसके भाई और जीजा की गिरफ्तारी के संबंध में समाचार सुर्खियां बने तो परमजीत ने सच्चई बताने के लिए अपनी बहन को जालंधर से फोन कर कहा- मैं जिंदा हूं।

तो आखिर कौन..
लेकिन पुलिस के खौफ के कारण मैं होशियारपुर नहीं आ रही। फिर जब नहीं रहा गया तो वह अदालत में खुद पेश हो गई।

यह है मामला
२६ सितंबर 2000 को गांव मुंडियां रंगड़ां में गन्ने के एक खेत से एक अज्ञात महिला का गला सड़ा पिंजर बरामद हुआ था। मौके पर पहुंची थाना बुल्लोवाल पुलिस ने पिंजर की पहचान परमजीत कौर के रूप में की। पोस्टमार्टम उपरांत परमजीत के भाई और जीजा को गिरफ्तार कर हत्या का मामला उन पर दर्ज कर दिया गया।

इस मामले में नंबरदार तरसेम सिंह, ज्वाला सिंह तथा अमरजीत सिंह गवाह भी बने, लेकिन सब झूठे साबित हुए। भाई गुरदयाल और जीजा बलदेव राज रिहा हो गए। गत दिनों हाईकोर्ट ने इस मामले में गृह सचिव, तत्कालीन एसएसपी, थाना प्रभारी और गवाहों को बिना अपराध सजा काटने पर पीड़ित पक्ष को मुआवजा देने के आदेश दिए हैं।

फिलहाल हाईकोर्ट का ऐसा कोई आदेश नहीं मिला है, इसलिए कुछ नहीं कह सकता। आदेश मिलने के बाद ही कुछ कहा जा सकता है।
- डा. सुखचैन सिंह गिल, एसएसपी





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