अमृतसर. डेरा सच्च सौदा के प्रमुख संत गुरमीत राम रहीम सिंह की मुश्किलें कम ही नहीं हो रहीं। अब दमदमी टकसाल ने बाबा की गिरफ्तारी की मांग उठा दी है। दमदमी टकसाल (भाई राम सिंह) के प्रमुख भाई राम सिंह ने डेरा सच्च सौदा के प्रमुख संत गुरमीत राम रहीम सिंह की गिरफ्तारी की मांग को लेकर संसद के समक्ष भूख हड़ताल पर बैठने का ऐलान किया है।
हड़ताल 20 जुलाई से शुरू की जाएगी। इससे पहले 19 जुलाई को टकसाल के कार्यकर्ताओं का जत्था अकालतख्त पर अरदास करेगा। सिख पंथ की चढ़दीकला की अरदास के बाद जत्था इसी दिन दिल्ली के लिए रवाना होगा। अगले दिन सुबह 10 बजे भूख हड़ताल शुरू की जाएगी। भाई राम सिंह ने जनसंपर्क अभियान भी शुरू करने की घोषणा की है।
पहली अगस्त से तख्त श्री दमदमा साहिब से शुरू किए जा रहे अभियान के तहत सिखों को डेरा प्रमुख के खिलाफ लामबंद किया जाएगा। गिरफ्तारी की मांग के अलावा सिख रैफरेंस लाइब्रेरी के महत्वपूर्ण दस्तावेजों की वापसी और धारा 25 में संशोधन की मांग भी उठाई जाएगी। टकसाल की सुप्रीम काउंसिल की बैठक में यह प्रस्ताव पारित किया गया है कि केंद्र और राज्य सरकार गुरमीत राम रहीम सिंह को गिरफ्तार करे। आरोप लगाया कि सरकार बाबा को गिरफ्तार नहीं कर रही।
करने में कोई दिलचस्पी नहीं है। गिरफ्तार करने की बजाय दोनों सरकारें उन्हें संरक्षण दे रही हैं। उन्हें बचाने का प्रयास किया जा रहा है, जिसे कतई बर्दाश्त नहीं किया जा सकता है।
सिख धर्म के महान शहीदों के दिवस मनाएगी एसजीपीसी : मक्कड़
अमृतसर. शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) ने सिख धर्म के महान शहीदों एवं शख्सियतों के दिवस मनाने की घोषणा की है। कमेटी के प्रधान अवतार सिंह मक्कड़ ने कुपरहीड़ा जहां, बड़े घल्लूघारे के दौरान करीब 35 हजार शहादतें हुई थीं, की याद में यादगार स्थापित करने का भी ऐलान किया है।
बुधवार को श्री दरबार साहिब स्थित गुरुद्वारा मंजी साहिब में आयोजित भाई मनी सिंह के शहीदी पर्व को समर्पित समारोह को संबोधित करते हुए मक्कड़ ने कहा कि एसजीपीसी ने हाल ही में सिख जगत के महान जरनैल बाबा बंदा बहादुर की याद में भी शहीदी पर्व मनाया है। शिरोमणि कमेटी ने बंदा बहादुर की याद में चप्पड़ चिड़ी स्थान पर यादगारी स्तंभ बनाने का भी फैसला किया है।
प्रमुख ढाडी सविंदर सिंह भंगू और भाई लखबीर सिंह कोमल के जत्थे ने गुरुओं और सिख जरनैलों की बहादुरी की वारें सुनाईं। भाई मनी सिंह के जीवन पर रोशनी डालते हुए मक्कड़ ने कहा कि हरमंदिर साहिब के पूर्व हैडग्रंथी भाई मनी सिंह ने मुगल शासकों के अत्याचारों का ़़डटकर सामना किया। दशम पातशाह गुरु गोबिंद सिंह से अमृत छकने वाले भाई मनी सिंह की शहादत बेमिसाल थी। उन्होने अंग -अंग कटवाए और उफ तक नहीं की। अकालतख्त के जत्थेदार जोगिंदर सिंह वेदांती ने कहा कि शहीद मनी सिंह महान टीकाकार, गुरमत के व्याख्याकार और शूरवीर योद्धा थे।
गुरु गोबिंद सिंह द्वारा लड़ी गई जंगों में भी उन्होंने अहम योगदान डाला। सिख इतिहास में उनका विलक्ष्ण स्थान है। इस मौके पर दरबार साहिब के हैडग्रंथी ज्ञानी गुरबचन सिंह और धर्म प्रचार लहर के इंचार्ज भाई बलदेव सिंह ने भी संबोधित किया। समारोह में दरबार साहिब के प्रबंधक हरभजन सिंह, ग्रंथी मल्ल सिंह, ग्रंथी ज्ञानी जगतार सिंह, ज्ञानी जसविंदर सिंह, एसजीपीसी सचिव रणवीरसिंह, वरियाम सिंह, संत मक्खन सिंह सेवापंथी, डा. जसबीर सिंह साबर आदि मौजूद थे।