करनाल.
हरियाणा पुलिस को कई मामलों में उसकी तलाश थी, लेकिन 30 जुलाई, 2007 को उसकी मौत हो चुकी है। जुंडला पुलिस ने पोस्टमार्टम के बाद परिजनों को शव सौंपा था।
बावजूद इसके पुलिस रिकार्ड में आज भी वह जीवित है। नतीजा, पुलिस वाले हर हफ्ते उसकी बूढ़ी मां से कहते हैं, ‘तुम्हारा बेटा जहां भी हो, उसे थाने भेजो।’ लाचार मां की हालत यह है कि वह अपने बेटे की मौत का गम भूलना चाहती है लेकिन पुलिस उसे भूलने नहीं देती है।
यह दास्तां निसिंग थानांतर्गत पड़ने वाले कतलाहेड़ी गांव के बोहती देवी (65) की है। बकौल बोहती उसके बेटे लाली (27) की मौत पिछले साल करनाल-असंध रोड पर सड़क हादसे में हो गई थी।
पुलिस करीब एक दर्जन बार उसकी मृत्यु प्रमाण पत्र की कॉपी ले जा चुकी है, लेकिन आज भी उसकी तलाश है। बोहती बार-बार यह कहकर थक चुकी है ‘मेरा बेटा जीवित नहीं है। वह मर चुका है, क्यों मुझे भी मारने पर तुले हो।’ पुलिस वाले हैं कि एक सवाल की रट लगाए हैं ‘लाली कहां है? उसे जल्दी पेश करो।’
बोहती का एक ही जवाब होता होता है ‘भगवान से पूछो, कहां है लाली? वही बताएंगे।’ आस-पड़ोस के लोग जब पुलिस को लाली की मौत के बारे में बताते हैं तो पुलिसकर्मी खामोश हो जाते हैं।
बोहती रोते हुए कहती हैं ‘डेथ सर्टिफिकेट की दर्जनों फोटो कॉफी कराई थी, जो भी पुलिस वाला आता है, अपने साथ एक कॉपी ले जाता है। कहता है यही रिकार्ड में लगा देंगे, अपनी तो ड्यूटी पूरी हो जाएगी। लाली के भाई शिव कुमार का कहना है करनाल के हर थाने में जाकर उसने लाली की मौत की खबर दी, फिर भी पुलिस घर आ जाती है।