कोटा. राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय (आरटीयू) में कुलपति और अफसरों का विवाद गहरा जाने से आरपीईटी, आरमेट व आरएमकेट प्रवेश परीक्षाओं के नतीजे फिर अटक गए हैं।
वित्त अधिकारी डॉ. देवराज ने राज्यपाल शीलेंद्र कुमार सिंह और वित्त सचिव दीपक उप्रेती को 2 और 8 मई, 08 को पत्र लिखकर पिछले साल हुई प्रवेश परीक्षाओं पर खर्च राशि में अनियमितताओं की ऑडिट कराने की मांग थी। इसके जवाब में 4 जुलाई को वित्त सचिव ने उक्त राशि की ऑडिट कराने के आदेश जारी कर दिए।
बुधवार को यह पत्र मिलने के बाद विवि में परीक्षा विभाग के कर्मचारियों ने काम बंद करने की चेतावनी दे दी। कुछ काम बंद करके चले गए। इस कारण, बुधवार को प्रस्तावित आरमेट का रिजल्ट घोषित नहीं हो पाया। रिजल्ट अटक जाने से प्रदेश भर के 70 हजार से ज्यादा विद्यार्थियों का भविष्य दांव पर लगा हुआ है। रजिस्ट्रार और वित्त अधिकारीपहले से ही लंबी छुट्टियों पर चल रहे हैं। बुधवार को विश्वविद्यालय को मिले वित्त विभाग के आदेश ने मामला और उलझा दिया।
सरकार ने बीते साल आयोजित की गई प्रवेश परीक्षाओं में दी गई पारिश्रमिक राशि 46 लाख रुपए की ऑडिट कराने का फैसला किया है। विश्वविद्यालय स्टाफ और अफसर इससे खफा हो गए और उन्होंने प्रवेश-परीक्षाओं के रिजल्ट तैयार करने का काम ठप करने की चेतावनी दी है। बुधवार को विवि में रजिस्ट्रार का काम देख रहे डॉ.संजीव मिश्रा को राज्यके वित्त सचिव दीपक उप्रेती का एक कार्यालय आदेश मिला, जिसमें वर्ष 2007 में हुई प्रवेश परीक्षाओं में कथित वित्तीय अनियमितताओं के आरोप के संदर्भ में ऑडिट कराने का उल्लेखकिया गया है।
नियमानुसार हुए भुगतान
गत वर्ष आरपीईटी के समन्वयक डॉ.ओपी छंगाणी ने बताया कि सभी वित्तीय भुगतान विश्वविद्यालय की वित्त समिति और प्रबंध मंडल की स्वीकृति के बाद ही किए गए हैं, इसमें अनियमितता जैसे आरोप निराधार हैं। ओवरटाइम के बिलों पर बॉम और वित्त समिति द्वारा दो बार स्वीकृति मिलने के बाद भी भुगतान नहीं हो सका है।
बुधवार को राज्य सरकार के वित्त सचिव से एक कार्यालय आदेश मिला है, जिसमें पिछले साल की प्रवेश परीक्षाओं के वित्तीय भुगतान की ऑडिट कराने का उल्लेख किया गया है। कुलपति को इस बारे में सूचित कर दिया है।
- डॉ. संजीव मिश्रा, कार्यवाहक रजिस्ट्रार, आरटीयू