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घोंसलों पर चला बुलडोजर

उदयपुर. आयड़ नदी और नालों की सफाई में असमय चले बुलडोजर ने हजारों चिड़ियों के घोंसलों को उजाड़ दिया। इसमें चिड़ियों के सैकड़ों बच्चों की मौत हो गई और अंडे तबाह हो गए।

पारिस्थितिकी अध्ययन के अनुसार इस क्षेत्र में खासतौर पर टिटहरी, वार्बलर, गजपांव, बया-टेलर बर्ड जैसी प्रजाति की चिड़िया अपना नीड़, मांडा और कोटर तैयार करती है। पक्षी विशेषज्ञ रजा तहसीन ने पंचवटी नाले की सफाई के दौरान चिड़ियाओं के घोंसलों को उजड़ते हुए और उनको चहकते हुए देखा है।

पंचवटी नाले में ही सौ से अधिक घोंसले थे। जब इन घोंसलों पर बुलडोजर चल रहा था, तब चिड़ियाएं थोड़ी ही दूरी पर दीवार और पेड़ पर बैठकर बच्चों और घोंसलों को बचाने के लिए चहक रही थी, लेकिन कोई भी इन मूक पक्षियों की आवाज को पहचान नहीं सका। तहसीन ने बताया कि चिड़ियाओं का प्रजनन काल मार्च से अप्रैल के बीच होता है। जून और जुलाई में चिड़ियाएं घोंसले बनाकर अंडे देती हैं।

घटती जा रही हैं चिड़ियाएं
प्रजनन काल के समय बच्चे और अंडों के नष्ट होने से चिड़ियाएं घटती जा रही हैं। शकरखोरा और वार्बलर जैसी चिड़ियाएं इस क्षेत्र में बहुत कम रह गई हैं।

पारिस्थितिकी तंत्र पर संकट
नदी-नालों से क्षेत्र का पारिस्थितिकी तंत्र भी जुड़ा हुआ है। बारिश से ठीक पहले और बाद में इन क्षेत्रों में कई कीड़े-मकोड़े पैदा हो जाते हैं, जिसका पक्षी भोजन के रूप में उपयोग करते हैं। यह फूडचेन की पहली कड़ी है जो खत्म होने की कगार पर है। इससे क्षेत्र का पारिस्थितिकी तंत्र बिगड़ने की आशंका है।

यह चिड़ियाओं के प्रजनन काल का समय है। नदी-नालों की सफाई का काम इससे पहले होना चाहिए। कीड़े-मकोड़े और चिड़ियाएं फूड चेन का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसके खत्म होने पर्यावरण को नुकसान होगा।
—प्रो. महीप भटनागर, जीव विज्ञान विभाग, सुखाड़िया विश्वविद्यालय

नदी-नालों की सफाई का काम सर्दियों में होना चाहिए ताकि चिड़ियाओं को बचाया जा सके।
—रजा तहसीन, पक्षीविद्





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