वाशिंगटन. दवाओं के घटक बनाने वाले भारत और चीन में जांच व निरीक्षण के लिए अमेरिका ने आस्ट्रेलिया व यूरोपी यूनियन से हाथ मिलाया है। दवा इकाइयों के निरीक्षण अक्सर किए जाएंगे, क्योंकि इन घटकों का इस्तेमाल अमेरिका में दवा बनाने में किया जाता है। ज्यादा जोखिम वाली दवाओं पर ज्यादा संसाधन लगाए जाएंगे।
हेल्थ एंड ह्यूमन सर्विसेस के मंत्री माइकेल लेविट ने एक सम्मेलन में कहा कि फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एफडीए) विदेशी नियामकों के साथ ज्यादा करीबी से काम करेगा।
कैसे होंगे परीक्षण:
आरंभिक योजना में चीन व भारत जैसे देश केंद्र में होंगे। भारत और चीन दुनिया में दवाओं के कच्चे माल बड़ी मात्रा में तैयार कर रहे हैं, लेकिन अमेरिका इन इकाइयों के परीक्षण नहीं कर पाता है। उनका कहना है कि ये उत्पाद उनकी कई दवाओं के आरंभिक घटक हैं।
लेविट का कहना है कि लक्ष्य हासिल करने के लिए अंतिम तारीख रखी गई है। एक बार इन्हें अमल में लाया गया तो ऐसे कई उत्पादों की सुरक्षा का दायरा बढ़ जाएगा, जिन्हें आम अमेरिकी इस्तेमाल करते हैं। अमेरिका ने हाल ही में वियतनाम के साथ एक करार किया है और भारत के साथ बातचीत चल रही है।
लेविट का कहना है कि अमेरिका कुछ इकाइयों का निरीक्षण करेगा। आस्ट्रेलिया और यूरोपी यूनियन भी इस मामले में अमेरिका के साथ हैं। चीन के तीन शहरों में एफडीए के कार्यालय खोले जा रहे हैं। भारत में भी यही करने की योजना बनाई जा रही है। लेविट के अनुसार भारत, वियतनाम, चीन, आस्ट्रेलिया, मेक्सिको, कनाडा, अल सल्वाडोर, कोस्टा रिका, पनामा, निकारागुआ, ग्वाटेमाला, होंडुरास, सिंगापुर के नेताओं से उनकी मुलाकात हो चुकी है।
लेविट ने कहा कि अमेरिकावासी जैसे-जैसे दुनियाभर के ताजा उत्पादों का मजा लेने लगेंगे, जरूरी दवाएं खरीदेंगे, कम लागत के कपड़े पहनेंगे, विदेशी कारें चलाएंगे, इलेक्ट्रानिक उत्पादों का इस्तेमाल करेंगे, अमेरिका की आयात प्रणाली लगातार जटिल होती जाएगी।