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कुलपति और शिक्षक भिड़े

रायपुर. रविवि को केंद्रीय विश्वविद्यालय बनाने की मांग कर रहे शिक्षकों और कुलपति डा. लक्ष्मण चतुर्वेदी के मध्य पत्र-वार छिड़ गया है। कुलपति की टिप्पणी से नाराज शिक्षकों ने अपने पत्र के जवाब में यहां तक लिख दिया है कि वे अगर कुलपति नहीं होते तो, माकूल जवाब दिया जाता।

विवि में यह लड़ाई पिछले कई महीनों से चल रही है। हालिया विवाद की शुरुआत 5 जुलाई को हुई। उस दिन विज्ञान भवन में बैठक हुई, जिसमें कुलपति ने आंदोलनरत शिक्षकों पर विपरीत टिप्पणियां कीं। उन्होंने कहा कि कुछ लोग रविवि को केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा दिलाने माहौल बना रहे हैं। उनकी इस टिप्पणी से नाराज शिक्षकों ने 8 जुलाई को डा. चतुर्वेदी को कड़ा पत्र लिखा।

रविवि शिक्षक संघ की ओर से दिए गए इस पत्र को पढ़ने के बाद डा. चतुर्वेदी ने आनन-फाननक में विभागों के प्रोफेसरों को बुलवाया और पत्र में लगाए गए आरोपों की जानकारी दी। सभी को उन्होंने पत्र की प्रतियां भी बांटी। उन्होंने कहा कि ये आरोप आप लोगों ने लगाए हैं। शिक्षकों में इसे लेकर काफी गुस्सा है। उनका कहना है, हमने गोपनीय पत्र लिखा था। इसे सार्वजनिक नहीं किया जाना चाहिए था। कुलपति का पद गरिमामय होता है, ऐसी हरकतें शोभा नहीं देती।

शुक्ल के सामने विवाद
5 जुलाई की सुबह 11.30 बजे विवि के शिक्षक रविवि को विश्वस्तरीय विवि का दर्जा दिलाने के आंदोलन को लेकर पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल से मुलाकात करने गए थे। वहां कुलपति डा. चतुर्वेदी को भी बुलवाया गया। श्री शुक्ल के सामने ही डा. चतुर्वेदी और शिक्षकों में कहा-सुनी हो गई।

शिक्षकों ने आरोप लगाया कि विवि संघ विश्वस्तरीय दर्जे के लिए जीतोड़ प्रयास कर रहा है, लेकिन कुलपति ही सहयोग नहीं कर रहे। खर्च से लेकर कागजों में हस्ताक्षर तक की प्रक्रिया में भी कुलपति का रवैया असहयोगात्मक रहा है। श्री शुक्ल ने शिक्षकों की बात सुनने के बाद कुलपति से सहयोग की अपेक्षा की। उसी शाम को कुलपति ने सभी प्रोफेसरों की बैठक बुलवाई और शिक्षकों पर गुस्से में आपत्तिजनक टिप्पणी कर दी।

क्या लिखा है पत्र में?
कुलपति को दिया गया पत्र तीखे अंदाज में लिखा गया है। इसमें कुलपति द्वारा की गई टिप्पणी पर कड़ी आपत्ति जताते हुए लिखा गया है कि जिन मांगों को लेकर विवि प्रयास कर रहा है, वह पूरे परिवार के लिए है। ‘फिर कुछ लोग.. जैसा संबोधन समझ से परे है’ शिक्षकों ने लिखा है कि यह उनकी विवशता है कि कुलपति पद की गरिमा एवं सम्मान का पर्याप्त ध्यान रखते हुए अपनी सीमाओं से परे नहीं जा सकते। यदि ऐसा नहीं होता तो हम बैठक के दौरान ही आपके कथनों का खंडन कर सकते थे।

रवैया ठीक नहीं: अध्यक्ष
रविवि शिक्षक संघ के अध्यक्ष एसके पांडे ने कहा कि कुलपति का रवैया कई मामलों में शिक्षकों के खिलाफ रहा है। उनकी टिप्पणी पर हमने गुप्त रूप से पत्र लिखकर विरोध किया। उन्होंने उसकी प्रतियां बंटवाकर सार्वजनिक कर दिया। यह कुलपति पद की गरिमा के साथ मनमानी है।





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