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Chhattisgarh
Raipur Raipur रायपुर.
कांग्रेस विधायकों ने कांकेर में जयपाल निषाद की संदिग्ध मौत के मामले में कांकेर सांसद की गिरफ्तारी की मांग को लेकर जमकर हंगामा किया। उन्होंने इसे राजनैतिक हत्या बताते हुए सरकार को आड़े हाथ लिया। हंगामा करते गर्भगृह में प्रवेश करने की वजह से अध्यक्ष ने 22 विधायकों को निलंबित कर दिया।
कांग्रेस विधायक महेंद्र कर्मा, रविंद्र चौबे और धनेंद्र साहू ने ध्यानाकर्षण सूचना के जरिए यह मामला उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि 20 जून को कांकेर जिले के ग्राम चंवाड़ में प्रेमानंद नागवंशी के खेत की नाली में जयपाल निषाद की लाश मिलना सामान्य घटना नहीं है।
यह राजनैतिक हत्या है। मृतक की जेब से पर्ची निकली है जिसमें सांसद कांकेर और बालोद विधायक के अलावा अन्य प्रतिनिधियों को पैसा देने का उल्लेख है। मृतक की पत्नी चंद्रकला निषाद ने राज्यपाल को लिखे शिकायती पत्र में भी सांसद और विधायक के नाम का उल्लेख किया है। इस घटना से साफ पता चलता है कि राज्य में पैसे का लेनदेन और भ्रष्टाचार चरम पर पहुंच गया हैं।
गृहमंत्री रामविचार नेताम ने अपने जवाब में कहा कि मामले को हत्या का रंग देने का प्रयास किया जा रहा है। केवल किसी कागज की पर्ची के आधार पर सांसद और विधायक को आरोपी नहीं माना जा सकता। मामले की गंभीरता को देखते सरकार ने पहले ही इसे जांच के लिए सीआईडी को सौंप दिया है। जांच में दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा।
कांग्रेस विधायक श्री नेताम से बार-बार चंद्रकला के पत्र में लिखे गए नामों की जानकारी मांग रहे थे लेकिन श्री नेताम ने यह कहते हुए बताने से इंकार कर दिया कि इससे जांच प्रभावित हो सकती है। इस मामले में काफी देर तक दोनों पक्षों में बहस होती रही। कांग्रेस विधायकों ने इस बात पर नाराजगी जताई कि उनके सवालों का गृहमंत्री जवाब नहीं दे रहे हैं।
सांसद का नाम आने के कारण जांच को पूरी तरह प्रभावित करने का प्रयास किया जा रहा है। कांग्रेेस विधायकों ने प्रेमानंद नागवंशी और सांसद के बीच क्या संबंध है, जानने के लिए कई सवाल किए। इस पर गृहमंत्री ने बताया कि वह अपने आपको सांसद का पीए बताकर काम करता रहता था। वह अधिकृत प्रतिनिधि नहीं है।
कांग्रेस विधायकों द्वारा सांसद का बार-बार नाम लिए जाने पर राजस्व मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने यह कहते हुए विरोध किया कि जब तक किसी पर आरोप प्रमाणित नहीं हो जाता तब तक किसी सांसद या विधायक को इस तरह बदनाम नहीं किया जा सकता। उन्होंने पूरी प्रक्रिया को विधानसभा की कार्यवाही से विलोपित करने का आग्रह किया। इस पर कांग्रेस विधायक भड़क उठे।
कांग्रेस विधायकों ने कहा कि जांच को प्रभावित करने के लिए पूरा मामला सीआईडी को सौंपा गया है। उन्होंने कहा कि इस मामले की सीबीआई से जांच कराई जानी चाहिए। गृहमंत्री ने सीबीआई जांच से इंकार कर दिया। उसके बाद कांग्रेस विधायक बार-बार सांसद को बचाने का आरोप लगाते रहे। इससे नाराज श्री अग्रवाल और अन्य भाजपा विधायकों ने विरोध शुरू कर दिया। कांग्रेस पर ओछी राजनीति का आरोप लगाते हुए उन्होंने नारे लगाने शुरू कर दिए। कांग्रेस विधायक भी हत्यारों को गिरफ्तार करने की मांग को लेकर नारे लगाने लगे। नारेबाजी के बीच ही कांग्रेस विधायक गर्भगृह में पहुंच गए।
विधानसभा उपाध्यक्ष बद्रीधर दीवान ने नारेबाजी के बीच ही सदन की कार्यवाही आगे बढ़ा दी। नारों के बीच ही याचिकाओं को प्रस्तुत किया गया। श्री दीवान ने कांग्रेस विधायकों के निलंबन का ऐलान करते हुए भोजन अवकाश के लिए विधानसभा स्थगित कर दी। विधायकों को भोजन अवकाश के बाद बहाल कर दिया गया।
उपाध्यक्ष की नसीहत
विधानसभा उपाध्यक्ष बद्रीधर दीवान ने गृहमंत्री के अधूरे जवाबों पर नाराजगी जताते हुए व्यवस्था दी कि गृह विभाग के अधिकारियों ने मंत्री को सारे तथ्यों से अवगत नहीं कराया है। वास्तव में उन्हें सारे तथ्य बताए जाने चाहिए।
निलंबित विधायक
महेंद्र कर्मा, रविंद्र चौबे, धनेंद्र साहू, भूपेश बघेल, रामचंद्र सिंहदेव, मोहम्मद अकबर, रेणु जोगी, बोधराम कंवर, ताम्रध्वज साहू, चुरावन मंगेशकर, डा. हरिदास भारद्वाज, डा. शक्राजीत नायक, कवासी लखमा, मोतीलाल देवांगन, चैतराम साहू, सियाराम कौशिक, राजकमल सिंघानिया, उदय मुदलियार, गणोशशंकर वाजपेयी, रामपुकार सिंह, महंत रामसुंदर दास और शिव डहरिया।