बीकानेर. शिक्षक नियुक्तियां 2007 में बीएड डिग्रीधारकों को नौकरियां देने के चक्कर में शिक्षा विभाग ने बिना पद सृजित किए ही शिक्षक लगा दिए। ऐसे प्रदेश में दो हजार से अधिक शिक्षक वेतन को तरस रहे हैं।
प्राशि विभाग ने वर्ष 2007 में 28029 शिक्षकों को नियुक्तियां देने के लिए विज्ञप्ति जारी की थी। इनमें करीब 18 हजार बीएड डिग्रीधारकों के पद रखे गए थे, जबकि विभाग के पास इतने पद ही नहीं थे। बीएड डिग्रीधारकों को नियुक्तियां देने के लिए प्रारंभिक शिक्षा विभाग ने रास्ता भी निकाला तथा छह हजार से अधिक प्राथमिक शालाओं को उच्च प्राथमिक में क्रमोन्नत करवा लिया।
नव क्रमोन्नत स्कूलों में तुरत-फुरत नियुक्तियां कर दी गईं, जबकि रिक्त पदों की वित्तीय स्वीकृति ही नहीं मिली थी। इन स्कूलों में बीएड डिग्रीधारकों को पद के विरुद्ध लगाया गया था। उप्रावि में हैडमास्टर का पद द्वितीय श्रेणी का होता है, जबकि उस पर भी तृतीय श्रेणी शिक्षक लगा दिए गए। नियमानुसार पदों का सृजन नहीं होने के कारण शिक्षकों का वेतन ही नहीं बन पाया है।
शिक्षा विभाग ने पद सृजित करने के प्रस्ताव सरकार को भेजे थे लेकिन अब तक स्वीकृति नहीं मिली है। शिक्षा विभाग ने तो 4450 रुपए के फिक्स वेतन पर शिक्षक लगाकर राज्य सरकार को लाभ पहुंचाने का कार्य किया है। सरकार तो वर्तमान में सभी पदों पर फिक्स वेतन पर नौकरी दे रही है।
कर्जदार हो रहे हैं शिक्षक
नौकरी लगने के चार माह बाद भी वेतन नहीं मिलने से शिक्षक कर्जदार होकर रह गए हैं। अजमेर, बाड़मेर, जैसलमेर सहित विभिन्न जिलों के शिक्षकों ने दूरभाष पर बताया कि घर से दूर गांव में सुविधाओं का अभाव है। बार-बार उधार मांगने पर अब तो गांव वाले भी हंसी उड़ाने लगे हैं। शिक्षा विभाग की जल्दबाजी का खमियाजा शिक्षकों को भुगतना पड़ रहा है। जिला शिक्षा अधिकारी भी स्पष्ट बात नहीं बता पा रहे हैं।
तबादलों से बिगड़ा समीकरण
प्रदेश की स्कूलों में रिक्त पदों का समीकरण तबादलों के कारण बुरी तरह बिगड़ गया है। कई जिले ऐसे हैं, जहां रिक्त पदों से अधिक संख्या में शिक्षक लगा दिए गए हैं। वहां अब वेतन आहरण की समस्या खड़ी हो जाएगी। इच्छित स्थान नहीं मिलने या इच्छा के विरुद्ध तबादले से प्रभावित शिक्षक नए स्थान पर ज्वाइन नहीं कर रहे हैं। वे वापस निरस्त करवाने की कोशिश में लगे हुए हैं, जिससे शिक्षा सत्र भी प्रभावित हो रहा है। बीकानेर सहित कई जिलों में शून्य परीक्षा परिणाम वालों को भी शहर में लगा दिया गया है।
डिग्री की जांच से भी रुकावट
आउटऑफ स्टेट की डिग्रियों की जांच भी वेतन में रुकावट बनी हुई है। विभाग ने आउट ऑफ स्टेट के डिग्रीधारकों को नियुक्ति देने से पहले शपथ-पत्र भरवाया था।
विभाग ने यह शर्त रखी थी कि सत्यापन में डिग्री सही मिलने पर ही वेतन दिया जाएगा। झांसी, बिहार, असम आदि कई राज्यों की डिग्रियों की जांच रिपोर्ट अब तक नहीं आई है। जांच के कुछ डिग्रियां फर्जी भी मिली है।
ऐसे सैकड़ों शिक्षक हैं, जिनकी डिग्रियों की जांच रिपोर्ट निदेशालय पहुंच चुकी है लेकिन संबंधित जिला शिक्षा अधिकारियों तक रिपोर्ट नहीं पहुंचने के कारण शिक्षकों को वेतन अब तक नहीं मिल सका है। भीलवाड़ा के हासिन ब्लॉक में कार्यरत महावीर प्रसाद शर्मा ने बताया कि उनके यहां 22 शिक्षकों को पांच माह से वेतन नहीं मिला।
शिक्षक संघ शेखावत ने इस संबंध में सोमवार को डीईओ को ज्ञापन भी दिया था। निदेशालय को कई बार पत्र लिखे गए हैं लेकिन जांच रिपोर्ट नहीं भेजी जा रही है।
विभाग ने पदों के विरुद्ध शिक्षक लगाए थे। नए पदों का सृजन नहीं हो पाया है। मामला राज्य सरकार के पास लंबित है।
-सुरेश कुमार वर्मा, मुख्य लेखाधिकारी, प्रारंभिक शिक्षा
मुख्यमंत्री ने स्कूलें क्रमोन्नत की थी। इसलिए वित्त विभाग को तुरंत बजट जारी करना चाहिए, ताकि शिक्षकों को वेतन मिले।
-महेन्द्र पांडे, महामंत्री, प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षक संघ
शिक्षकों को वेतन समय पर मिलना चाहिए। वेतन नहीं मिलने से उनकी आर्थिक स्थिति ढांवाडोल हो गई है। सरकार ने उनके साथ यह घिनौना मजाक किया है।
-भंवर पुरोहित, प्रांतीय वरिष्ठ उपाध्यक्ष, शिक्षक संघ शेखावत