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गरजे और जमकर बरसे

जोधपुर. rain इंद्रदेव मेहरबान हुए और गुरुवार को सूर्यनगरी में बादल झूमकर बरसे। गुरुवार शाम करीब चार बजे आसमान में घने काले बादल छा गए। कुछ ही देर में हल्की बारिश होने लगी और करीब साढ़े चार बजे तेज गर्जना और कौंधती बिजली के बीच मूसलाधार बरसात होने लगी।

बरसात का वेग इतना तेज था कि आधा-पौन घंटे में ही करीब दो इंच पानी बरस गया। मूसलाधार बरसात से नाले उफनने लगे, सड़कें नहरें बन गई, हालात ये हो गए कि सरकारी दफ्तरों, कॉलोनियों, निचली व कच्ची बस्तियों सहित अनेक इलाकों में पानी भर गया।

बरसात ने एक बार फिर जलनिकासी व्यवस्था की पोल खोल दी। उद्यान तरणताल बन गए। नेहरू पार्क, उम्मेद उद्यान, पाश्र्वनाथ वाटिका व हाउसिंग बोर्ड में अस्त-व्यस्त पड़े अनेक पार्र्को में पानी जमा होने से ताल-तलैया बन गए। वीआईपी बंगलों में पानी भर गया। हर तरफ पानी ही पानी नजर आ आया। दुपहिया वाहन जवाब दे गए। लोग बाइक को घसीटते ले जा रहे थे। घुटने-घुटने पानी से जनजीवन ठहर गया। कई कॉलोनियां पानी से घिरीं : बरसाती नालों में उफान से पुलिस लाइन स्थित स्टाफ क्वार्टर्स, अजीत कॉलोनी, राइकाबाग कॉलोनी, सरस्वती नगर, नेहरू कॉलोनी, बैंक कॉलोनी तथा शहर के बाहरी इलाकों में स्थित केके कॉलोनी, पीडब्ल्यूडी कॉलोनी, मूथाजी मंदिर,हाईकोर्ट कॉलोनी तथा पाबूपुरा बस्ती में पानी घुस गया। जिससे ये इलाके छोटे-बड़े तालाब बन गए। मकानों के भीतर तक पानी आने से लोग परेशान रहे। शहर के भीतरी भाग हाथीराम का ओडा, बंबा मोहल्ला, फतेहसागर व माणक चौक इलाके पानी से घिर गए। पावटा क्षेत्र में राइकाबाग रेलवे स्टेशन, बस स्टेंड, सब्जी मंडी में पानी जमा हो जाने से यातायात अवरुद्ध रहा।

मसूरिया क्षेत्र के घरों में घुसा पानी : मसूरिया स्थित शिवाजी मार्ग एवं बाबूराम मार्ग के घरों में पानी घुस गया। लोगों को टेबल, कुर्सी व चारपाई पर बैठकर रात गुजारनी पड़ी। कई लोग बाल्टियां व मग लेकर पानी निकालने लगे। दरअसल इस क्षेत्र में बने नाले की ऊंचाई अधिक होने से बरसाती पानी आगे निकल नहीं पाता और घरों में घुस आता है। मोहल्लेवासियों ने कई बार प्रशासन से मांग की है, मगर कोई कार्रवाई नहीं हुई। क्षेत्रवासियों ने चेतावनी दी है कि दो-तीन दिनों में कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन किया जाएगा। पूर्व में भी क्षेत्रवासी आंदोलन कर चुके हैं।

सड़कें फिर उधड़ीं, करंट से गाय मरी : भारी बरसात से जलमग्न हुई सड़कें पानी के वेग से कई जगह से उधड़ गई व कई जगह गड्ढ़े पड़ गए। वहीं सड़कों के किनारे स्थित विद्युल पोल व ट्रांसफार्मर भीगने से कई जगह पानी में करंट फैलने की शिकायत पर कई इलाकों में बिजली बंद करनी पड़ी। नई सड़क पर करंट फैलने से एक गाय की मौत हो गई।

जिधर देखो उधर पानी : बारिश इतनी तेज थी कि एक घंटे में शहर में चारों ओर पानी ही पानी नजर आने लगा। सड़कों पर बहते पानी से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया। यातायात अवरुद्ध हो गया, वाहन फंस गए। निचली बस्तियों में लोगों ने घरों से तो पानी निकाल दिया मगर खुद घर में कैद हो गए, क्योंकि घर से बाहर जाने का रास्ता तो नहर बन चुका था। खतरनाक पुलिया की कहानी भी जस की तस है।

एमडीएम बना तरणताल : भारी बरसात से शास्त्रीनगर स्थित एमडीएम अस्पताल चारों ओर पानी से घिर गया। इससे अस्पताल में मौजूद मरीजों के परिजनों को भारी परेशानी हुई। सर्किल से अस्पताल की ओर जाने वाली मुख्य सड़क सहित पूरा अस्पताल परिसर जलमग्न हो गया। अस्पताल के ट्रोमा सेंटर तथा मेडिकल व सर्जिकल आउटडोर में मौजूद मरीजों को दिक्कतें उठानी पड़ी।

वीआईपी बंगले भी नहीं बचे : रातानाडा क्षेत्र में पानी निकासी के अभाव में वीआईपी बंगलों में पानी घुस गया। गेट के भीतर तक पानी से तालाब की स्थिति बन गई। पानी निकासी केउपाय कारगर सिद्ध नहीं हुए। मेहरानगढ़ रोड बरसात के दौरान नदी में तब्दील हो गई।

जल निकासी की समस्या जस की तस : बारिश के दिनों में जल निकासी की समस्या की पोल खुलती है। यह बात साफ हो गई है कि शहर की जल निकासी की समस्या जस की तस है। तेज बरसात से कलेक्ट्रेट परिसर तालाब में बदल गया। कई जगह दुपहिया, तिपहिया और फोर व्हीलर पानी में फंस गए। तेज बरसात से नाले उफन गए।

नहाने का उठाया लुत्फ : बच्चों व बड़ों ने घर की चारदीवारी व छतों पर खड़े होकर नहाने का लुत्फ उठाया। महिलाएं भी भीगने का मोह नहीं छोड़ पाई। तेज गर्मी व उमस के बाद हुई बरसात से लोगों को राहत मिली। तापमान में तीन डिग्री की कमी आ गई।

सैलानियों ने नजारे देखे : रैन कोट पहने विदेशी सैलानी वर्षा के नजारे देखने में तल्लीन रहे। घंटाघर क्षेत्र में कुछ सैलानी जहां वर्षा में भीगने लगे तो कुछ रैन कोट पहने दुकान की छत नीचे खड़े होकर बरसात का मजा लेते रहे।





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