जोधपुर. ‘हर होशियार स्टूडेंट डॉक्टर या इंजीनियर ही बनना चाहता है। ऐसे स्टूडेंट कॅरियर के रूप में रिसर्च को अपनाने के लिए कैसे प्रेरित होंगे?’ कोलकाता की बायोटेक फस्र्ट ईयर की स्टूडेंट अरुन्वा रॉय के इस सवाल ने पूर्व राष्ट्रपति डा. एपीजे अब्दुल कलाम को इतना उद्वेलित किया कि उन्हें देश में ‘साइंस कॉडर’ की जरूरत महसूस होने लगी है।
उन्होंने कहा कि स्टूडेंट ही नहीं, उनके परिजन भी यही मानते हैं कि इंजीनियरिंग, मैनेजमेंट या मेडिकल में डिग्री लेने से उनके बेटा या बेटी बेहतर ढंग से सेटल हो जाएंगे। उन्हें रिसर्च में कोई व्यावसायिक गारंटी नजर नहीं आती।
ऐसे हालात उन लोगों के लिए गारंटेड कॅरियर के अवसर खोजने चाहिए, जो साइंस को एक मिशन के रूप में लेना चाहते हैं। कलाम ने कहा कि हमें एक साइंस कॉडर बनाने पर काम करना चाहिए। जिसके लक्ष्य स्पष्ट हों और जिसमें आकर्षक वेतन के साथ तरक्की की राह नजर आती हो। कलाम यहां टाउन हॉल में गुरुवार को 16 वीं प्रो. दौलतसिंह कोठारी स्मृति व्याख्यानमाला में बोल रहे थे।
उन्होंने कहा कि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, कृषि व बायोटेक्नोलॉजी विभाग, सीएसआईआर, इसरो, डीआरडीओ, यूनिवर्सिटी जैसे वैज्ञानिक संस्थानों में साल में कम से कम 400 एमएससी तथा 200 पीएचडी स्टूडेंट को तरक्की की भरपूर संभावनाओं के साथ जोड़ा जाना चाहिए।
केबिनेट की विज्ञान एवं विज्ञान सलाहकार कमेटी भी इस तरह की सिफारिश कर सकती है। उन्होंने इस बात पर खुशी जताई कि इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एजुकेशन एंड रिसर्च खुलने से अच्छे नतीजे आएंगे।